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पूजा खेडकर की मां से जुड़ी इंजीनियरिंग कंपनी सील, दो साल से नहीं जमा किया था संपत्ति कर

IAS Pooja Khedkar: अधिकारियों ने बताया कि पुणे के पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निकाय ने इंजीनियरिंग कंपनी को लगभग दो लाख रुपये का संपत्ति कर बकाया होने पर शुक्रवार को सील कर दिया। यह कंपनी ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की मां से जुड़ी हुई थी।

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IAS Pooja Khedkar

Photo : Twitter

IAS Pooja Khedkar: विवादों में घिरी ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की मुसीबत बढ़ती जा रही है। अब उनकी मां से जुड़ी एक इंजीनियरिंग कंपनी को सील कर दिया गया है। पुणे के पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निकाय ने इंजीनियरिंग कंपनी को लगभग दो लाख रुपये का संपत्ति कर बकाया होने पर शुक्रवार को सील कर दिया। बता दें, एक आपराधिक मामले में मनोरमा खेडकर फिलहाल पुणे पुलिस की हिरासत में हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस ने मुलशी तहसील के धाडवाली गांव में 2023 में भूमि विवाद को लेकर कुछ लोगों को पिस्तौल दिखाकर धमकाने के आरोप में मनोरमा खेडकर को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया था।

पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) ने बताया कि संपत्ति का बकाया न चुकाने पर तलावडे क्षेत्र में स्थित बंद पड़ी कंपनी थर्मोवेरिटा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सील कर दिया गया। पीसीएमसी आयुक्त शेखर सिंह ने बताया कि थर्मोवेरिटा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का 2022-2023 और 2023-2024 का संपत्ति कर पिछले दो वर्षों से लंबित है। साथ ही चालू वर्ष का बकाया भी लंबित है। चूंकि 2023 में उनका बकाया भुगतान नहीं किया गया था, इसलिए पहले उन्हें नोटिस जारी किया गया और बाद में क्रमिक कदम के रूप में, हमने सबसे पहले उनका पानी का कनेक्शन काट दिया। पिछले दो वर्षों से बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है, इसलिए अगले कदम के रूप में हमने संपत्ति को सील कर दिया है

कंपनी पर 1.96 लाख रुपये बकाया

अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों का कुल बकाया 1.96 लाख रुपये है और यदि चालू वर्ष का बकाया भी जोड़ दिया जाए तो लंबित राशि 2.77 लाख रुपये हो जाती है। मालूम हो कि पूजा खेडकर ने आरक्षण के तहत सिविल सेवाओं में चयन के लिए पिंपरी-चिंचवाड़ स्थित यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल (वाईसीएम) में दिव्यांगता प्रमाण पत्र की खातिर आवेदन करते समय अपने आवासीय पते के रूप में इंजीनियरिंग कंपनी का पता दिया था।

यूपीएससी ने भी शुरू की कार्रवाई

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार को परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के खिलाफ कई कार्रवाई शुरू की, जिनमें फर्जी पहचान पत्र के जरिए सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के आरोप में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराना शामिल है। आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा-2022 के लिए उनकी उम्मीदवारी रद्द करने और भविष्य की परीक्षाओं में शामिल होने से रोकने के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। 2023 बैच की आईएएस अधिकारी खेडकर पर हाल में पुणे में अपने प्रशिक्षण के दौरान विशेषाधिकारों का दुरुपयोग करने और सिविल सेवा में चयन के लिए फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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