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बंगाल निगम भर्ती घोटाला : ED ने कसा शिकंजा, मदन मित्रा,TMC विधायक, पूर्व मंत्री के ठिकानों पर रेड

अब तक की जांच में पता चला है कि मदन मित्रा ने बिचौलिए के जरिए नकद एवं गोल्ड के रूप में रिश्वत ली। इस रिश्वत के बदले उन्होंने कथित रूप से कमरहाटी निगम सहित अन्य निकाय संस्थाओं में अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्तियां कीं।

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निगम भर्ती घोटाला मामले में ईडी की रेड। -फाइल पिक्चर

Photo : PTI

ED Raid in West Bengal: पश्चिम बंगाल के निगम भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। ईडी ने शनिवार सुबह भवानीपुर स्थित मदन मित्रा के आवास, TMC विधायक और पूर्व मंत्री के ठिकानों पर छापे मारे। जांच एजेंसी के ये छापे सात जगहों पर पड़े हैं। इन जगहों तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अब तक की जांच में पता चला है कि मदन मित्रा ने बिचौलिए के जरिए नकद एवं गोल्ड के रूप में रिश्वत ली। इस रिश्वत के बदले उन्होंने कथित रूप से कमरहाटी निगम सहित अन्य निकाय संस्थाओं में अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्तियां कीं। छापे के समय मित्रा अपने कमरहाटी स्थित आवास या भवानीपुर के घर में हैं, यह पता नहीं चल पाया।

रिश्वत में नकद-सोना लेने का आरोप

अधिकारियों ने बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती राज्य सरकार में मंत्री रहे मित्रा से जुड़े कुल सात परिसरों पर छापेमारी की जा रही है। मित्रा पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की कमरहटी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। ईडी अधिकारियों का आरोप है कि मित्रा ने कमरहटी नगरपालिका समेत कई नगरपालिकाओं में अलग-अलग पदों पर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बदले बिचौलियों के जरिए रिश्वत के रूप में नकद और सोना लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मित्रा ऐसी 125 अवैध नियुक्तियों से 'जुड़े’हुए हैं।

लेन-देन में बिचौलियों की अहम भूमिका

ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) का मानना है कि कथित तौर पर बिचौलियों ने इन लेन-देन को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने नौकरी के अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के बीच सेतु का काम किया। जांच एजेंसियों ने इस मामले को कई नगरपालिकाओं से जोड़ा है, जिनमें कामरहाटी नगरपालिका भी शामिल है। यहां बड़ी संख्या में संदिग्ध नियुक्तियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मित्रा का कथित तौर पर 125 से अधिक अवैध भर्तियों से संबंध है, जिससे स्थानीय निकायों में व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है।

ED ने जुटाए हैं अहम साक्ष्य

छापेमारी का उद्देश्य दस्तावेजी साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जुटाना है, ताकि कथित धन के लेन-देन (मनी ट्रेल) का पता लगाया जा सके और घोटाले में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि छापों के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य कथित अनियमितताओं की वास्तविक सीमा और विभिन्न आरोपियों की भूमिका तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे-ईडी

नगरपालिका भर्ती घोटाले ने पश्चिम बंगाल में पहले ही राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। विपक्षी दल मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, ईडी ने दोहराया है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ईडी ने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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