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20 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया ईडी का अधिकारी, सीबीआई ने किया गिरफ्तार

CBI Arrested ED Assistant Director: ईडी के सहायक निदेशक संदीप सिंह यादव ने मुंबई के एक जौहरी को 25 लाख रुपये न देने पर उनके बेटे को गिरफ्तार करने की कथित तौर पर धमकी दी थी। बातचीत के दौरान 20 लाख रुपये की रिश्वत देने पर बात तय हुई थी।

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सीबीआई ने ईडी अधिकारी को किया गिरफ्तार।

Photo : BCCL

CBI Arrested ED Assistant Director: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई में बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई की टीम ने यहां एक जौहरी से 20 लाख की रिश्वत लेने के आरोप में ईडी के एक सहायक निदेशक को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि ईडी का अधिकारी रिश्वत न देने पर जौहरी को धमकी दे रहा था, जिसके बाद पीड़ित जौहरी ने सीबीआई का रुख किया था।

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तीन और चार अगस्त को जौहरी विपुल हरीश ठक्कर के परिसरों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद सहायक निदेशक संदीप सिंह यादव ने उन्हें 25 लाख रुपये न देने पर जौहरी के बेटे को गिरफ्तार करने की कथित तौर पर धमकी दी थी। अधिकारियों ने बताया कि बातचीत के दौरान 20 लाख रुपये की रिश्वत देने पर बात तय हुई। बाद में, जौहरी ठक्कर ने सीबीआई में इसकी शिकायत की थी।

रंगे हाथ पकड़ा गया ईडी का अधिकारी

सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है, स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में शिकायत के सत्यापन से प्रथम दृष्टया पता चला कि प्रवर्तन निदेशालय मुख्यालय, नयी दिल्ली के सहायक निदेशक संदीप सिंह ने अज्ञात अन्य लोगों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता विपुल ठक्कर के बेटे निहार ठक्कर को गिरफ्तार न करने के लिए स्वयं तथा एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से 20 लाख रुपये की रिश्वत प्राप्त करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा था। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अधिकारी यादव को एजेंसी की मुंबई इकाई ने राष्ट्रीय राजधानी में रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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