चुनाव आयोग ने देश की चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी और साफ रखने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने अब नए राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण कराने के लिए आवेदन करने वाले संगठनों और उनके संस्थापक सदस्यों की गहन जांच करने का निर्णय लिया है।
गैर सक्रिय दलों पर गिरी गाज
राजनीतिक दलों का पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29ए के तहत किया जाता है। चुनाव आयोग ने हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में गैर सक्रिय और अस्तित्वहीन दलों को सूची से बाहर किया है। इसी क्रम में अगस्त 2025 के पहले चरण में 334 पंजीकृत अप्रमाणित राजनीतिक दलों को हटा दिया गया। इससे पहले कुल 2854 ऐसे दल थे जिनकी संख्या घटकर 2520 रह गई। इसके बाद अगस्त 2025 के दूसरे चरण में आयोग ने और 476 राजनीतिक दलों की पहचान की और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को इनके सत्यापन के आदेश दिए।
संस्थापक सदस्यों की होगी सख्त जांच
अब आयोग ने पंजीकरण के शुरुआती चरण में ही संस्थापक सदस्यों की जांच को अनिवार्य कर दिया है। कई मामलों में यह पाया गया है कि कुछ संगठनों ने झूठे या हेरफेर किए हुए हलफनामे देकर दल का पंजीकरण कराने की कोशिश की। ऐसे मामलों को रोकने और केवल असली आवेदनों को ही आगे बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने फैसला लिया है कि संस्थापक सदस्यों के कम से कम 20 हलफनामों का रैंडम चयन कर उनकी जांच की जाएगी। अगर सदस्यों के पते अलग अलग जिलों या राज्यों से होंगे तो संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों के जरिए जांच कराई जाएगी।
चुनाव आयोग का कहना है कि इस कदम से न सिर्फ पंजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी बल्कि फर्जी और गैर जिम्मेदाराना आवेदनों पर भी अंकुश लगेगा। यह साफ करता है कि चुनाव आयोग देश में मतदाता व्यवस्था और राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रहा है।
