Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही उनकी सरकार के अधिकारियों को धमका रहे हैं और राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर आग से खेलने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि मतदाता सूची से छेड़छाड़ का कोई भी प्रयास लोकतंत्र के साथ विश्वासघात होगा।
कहा- चुनाव आयोग अधिकारियों को धमका रहा
पश्चिम बंगाल सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने कहा, चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने आश्चर्य जताया कि चुनाव आयोग के अधिकारी राज्य का दौरा करके सरकारी अधिकारियों को कैसे बुला सकते हैं, जबकि चुनाव की तारीखों की घोषणा अभी बाकी है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
ममता बनर्जी ने दावा किया, यह एसआईआर जैसा दिखता है वैसा नहीं है। इसका इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) जैसी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एक आवरण के रूप में किया जा रहा है।
बिहार SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
बता दें कि आज बिहार SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक आरोप यह था कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों के नाम थे, लेकिन अचानक उनके नाम लिस्ट से गायब हो गए। मुझे अब तक तीन हलफनामे मिले हैं, हमने इसकी जांच की है, यह हलफनामा पूरी तरह से झूठा है। बिहार SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।
आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये भी आरोप लगाया गया था कि ड्राफ्ट लिस्ट में मौजूद लोगों का नाम फाइनल लिस्ट से गायब है, उन्हें कारण बताया नहीं गया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से जो जानकारी दी गई है, वह गलत है। राकेश द्विवेदी ने कहा कि जिस एक व्यक्ति की बात हलफनामे में की गई है, उसका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं था, उसने गणना प्रपत्र (Enumeration Form) जमा ही नहीं किया था।
