पूरी दुनिया हिजाब के खिलाफ जंग लड़ रही है लेकिन असदुद्दीन ओवैसी बार-बार हिजाब पर बयानबाजी कर भड़काने का काम कर रहे हैं। एक बार फिर ओवैसी ने कहा है कि एक दिन इस देश में हिजाब वाली प्रधानमंत्री बनेगी। अगर ओवैसी मां-बेटियों की हक की बात कर रहे हैं तो फिर क्यों बेटियों को जबरदस्ती हिजाब थोपना चाहते हैं। हिजाब के बहाने ओवैसी चुनावी प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। ओवैसी बेटियों की बात कर रहे हैं। हिजाब को उनका हक बता रहे हैं लेकिन खुद की पार्टी में ही ओवैसी महिलाओं को कितनी तवज्जो देते हैं। अगर आप देश में हिजाब वाली महिला प्रधानमंत्री बनना देखना चाहते हो तो कम से कम अपनी पार्टी में महिलाओं को तवज्जो देते लेकिन नहीं।
टाइम्स नाउ नवभारत के शो राष्ट्रवाद में बहस के दौरान पैनल में शामिल डॉ. रिजवान अहमद ने हिजाब के नाम पर नफरत फैलाने वालों को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें नॉमनेटेड होती हैं और कुछ चीजें एलेक्टेड होती हैं। ये लोकंतत्र है। तीन महिलाएं जीत कर आई हैं। वो हिजाब पहनती हो, बु्र्का पहनती हों या घाघरा चोली पहनती हो तो मतलब नहीं है। वो घुंघट डालती हों तो मतलब नहीं। जीतकर आई हैं कल को समीकरण बैठेंगी तो मेयर बन जाएंगी। यही बात इन लोगों को लोकतंत्र की समझानी है। तुम हिजाबन, हिजाबन कह कर मातम न करो। जिस दिन लोकतंत्र में समीकरण बैठेगा तुम बन जाना। तुम्हें कौन मना कर रहा है। रिजवान अहमद ने माजिद हैदरी से पूछा कि क्या पर आप चाहते है कि जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री हिंदू औरत बने। उसके बाद फिर क्या हुआ नीची वीडियो में आप खुद देख लीजिए।
हम असदुद्दीन ओवैसी से सीधा सवाल पूछते हैं कि आपकी पार्टी के बड़े पदों पर कितनी महिलाएं हैं। हिजाब वाली महिला का हक क्या AIMIM में नहीं है। AIMIM के पार्टी अध्यक्ष से लेकर महासचिव, प्रवक्ताओं में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है। इतना ही नहीं राज्यों में पार्टी की अध्यक्ष भी कोई महिला नहीं है। मैं पूरी लिस्ट आपको दिखा रहा हूं और तो और ओवैसी की पार्टी से कोई महिला सांसद तक नहीं है लेकिन यहां ओवैसी को हिजाब वाली बेटियों का हक नहीं दिखता। ओवैसी को हिजाब के बहाने चुनावी एजेंडा सेट करना है तो वो ऐसी भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं जिससे उनको चुनाव में फायदा मिल सके। ओवैसी के इस बयान पर बीजेपी का कहना है कि ओवैसी धर्म के आधार पर ही राजनीति करते हैं जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़े।
