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अमित शाह जवाब दो...संसद परिसर में विपक्ष का मार्च, गृह मंत्री से सदन में आकर जवाब देने की मांग

मार्च में शामिल सांसदों ने हाथों में एक बड़ा बैनर पकड़ रखा था, जिस पर 'अमित शाह जवाब दो' लिखा हुआ था। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इन मुद्दों पर सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।

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संसद में कांग्रेस का प्रोटेस्ट मार्च

Photo : PTI

Protest March in Parliament Complex: अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करते हुए विपक्षी दलों ने बुधवार को संसद परिसर में मार्च निकाला। विपक्षी नेताओं ने छात्रों पर कार्रवाई के मामले में सरकार की जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह से संसद में आकर बयान देने की मांग की। यह मार्च संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर महात्मा गांधी की प्रतिमा से शुरू होकर संसद भवन के मकर द्वार तक निकाला गया।

मार्च में शामिल सांसदों ने हाथों में एक बड़ा बैनर पकड़ रखा था, जिस पर 'अमित शाह जवाब दो' लिखा हुआ था। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इन मुद्दों पर सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव सहित विभिन्न विपक्षी दलों के अनेक सांसद शामिल हुए।

खरगे की मांग- पीएम और गृह मंत्री दें बयान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संवाददाताओं से कहा कि विपक्ष की मांग स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर अपना पक्ष रखें। उन्होंने कहा, हमारी मांग यही है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं। वो अपना बयान दें, हम चर्चा करने को तैयार हैं। चर्चा से ही हल निकलेगा। सदन शुरू हुए काफी दिन हो गए हैं। उन्हें आना चाहिए। सदन में न आकर वो संसद का अपमान कर रहे हैं। खरगे ने कहा कि विपक्ष लगातार सदन में चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इस पर सहमत नहीं हो रही है।

उनका कहना था कि संसद जनता के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च मंच है और सरकार को वहां अपनी बात रखनी चाहिए। मार्च में शामिल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता में बैठे लोगों की जनता के प्रति जवाबदेही होती है और यदि किसी घटना में बल प्रयोग हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा, इस मार्च का संदेश यह है कि जो लोग सत्ता में हैं, उनकी लोगों के प्रति जिम्मेदारी है। यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं है और न ही कोई राज दरबार है।

पैलेट गन इस्तेमाल की जिम्मेदारी किसकी :प्रियंका

प्रियंका गांधी ने कहा, अगर कुछ हुआ है, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी किसी की तो होनी चाहिए। किसी ने तो इसका आदेश दिया होगा, इसलिए जिम्मेदारी लीजिए। यही इस देश की परंपरा रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार जवाबदेही से बच रही है।

विपक्ष का कहना है कि इन दोनों मामलों में सरकार को संसद में विस्तृत बयान देना चाहिए और सदस्यों को चर्चा का अवसर मिलना चाहिए। इन मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसद पिछले कई दिनों से संसद परिसर में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने पांच अगस्त की तिथि को देखते हुए जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी उठाई। केंद्र सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को संसद में विधेयक पारित करवाकर अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया था और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था।

बीते 20 जुलाई को आरंभ हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान लगातार गतिरोध बना हुआ है। दोनों सदनों में हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित हुई है। सरकार का कहना है कि वह नियमों के तहत चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष गृह मंत्री का जवाब चाहता है।

राज्यसभा की बैठक फिर स्थगित

राम मंदिर चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण बुधवार को राज्यसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उच्च सदन की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू हुई तो सदन में विपक्षी सदस्यों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए हंगामा फिर से शुरू कर दिया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध किया।

सदन में तख्तियां दिखाने पर आगाह किया

सभापति सी पी राधाकृष्णन ने हंगामा कर रहे सदस्यों को आगाह किया कि वे आसन के समीप न आएं और सदन में तख्तियां भी न दिखाएं। सभापति ने कहा कि जो कुछ उन्होंने कहा, सदस्य उसका ध्यान रखें क्योंकि वह दूसरा मौका नहीं देंगे और कार्रवाई करने के लिए बाध्य हो जाएंगे। उन्होंने सदन में प्रश्नकाल शुरू कराया और सदस्यों ने पूरक प्रश्न पूछे तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने उन प्रश्नों के जवाब दिए। हंगामे के कारण उनकी बात सुनी नहीं जा सकी। इस बीच, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए विपक्षी सदस्य अपने स्थानों से उठ कर आगे आ गए। इनमें से कुछ के हाथों में तख्तियां भी थीं। हंगामा कर रहे सभी सदस्य शाह के बयान की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उनका विरोध किया।

सदन में हंगामे और शोरगुल के कारण सभापति ने उच्च सदन की बैठक 12 बज कर 17 मिनट पर अपराह्न तीन बजे तक स्थगित कर दी।

विपक्ष ने अमित शाह के बयान की मांग दोहराई

इससे पहले, सुबह 11 बजे बैठक शुरू होने पर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और शून्यकाल के तहत सदस्यों से लोकमहत्व से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए कहा। इसी दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी सदस्यों ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग दोहराई। सभापति ने सदस्यों ने शून्यकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने शून्यकाल के तहत मुद्दे उठाने के लिए सदस्यों के नाम पुकारे लेकिन विपक्षी सदस्यों ने अपनी मांग के समर्थन में नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। कुछ सदस्य अपने स्थानों से उठकर आगे आ गए। सभापति ने इन सदस्यों को अपने स्थानों पर लौट जाने के लिए कहा।

हंगामे के बीच ही कुछ सदस्यों ने शून्यकाल के तहत लोकमहत्व से जुड़े मुद्दे उठाए। एक सदस्य ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया जिसे सभापति ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जब सदन में व्यवस्था ही नहीं है तो व्यवस्था के प्रश्न का सवाल भी नहीं उठता। राधाकृष्णन ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत रहने और शून्यकाल चलने देने की अपील : की। अपनी बात का असर होते न देख उन्होंने 11 बजकर 24 मिनट पर बैठक को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई सहित विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध बने होने के कारण उच्च सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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