उत्तरकाशी में फटा था बादल (फोटो- PTI)
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने से उत्पन्न भीषण बाढ़ के चार दिन बाद भी बचाव और राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, अब तक 650 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि कई अभी भी लापता हैं। घटना के समय क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिक, पर्यटक और स्थानीय निवासी मौजूद थे। जीवित बचे लोगों को ढूंढने तथा मलबे के विशाल ढेर के नीचे दबे शवों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों और रडारों का उपयोग किया जा रहा है। बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए सेना ने भागीरथी नदी पर एक पुल बना दिया है। सेना के एक अधिकारी ने कहा, “आज हमने भागीरथी नदी पर पुल बना दिया है जिसका उपयोग करके घायलों और फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जा रहा है।”
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शुक्रवार को खोजी कुत्तों, ड्रोनों, रडारों और बचावकर्मियों की मदद से लापता लोगों की तलाश की गई। मलबे के 50 से 60 फीट ऊंचे ढेर के कारण यह कार्य बेहद कठिन और संवेदनशील बना हुआ है। अब तक चार लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सेना के नौ जवानों सहित 16 लोग अभी भी लापता हैं।
सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और पुलिस बल के 800 से अधिक बचावकर्मी घटनास्थल पर जुटे हैं। सेना ने भागीरथी नदी पर एक अस्थायी पुल भी बना दिया है जिससे फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। सेना के लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने बताया कि, “हर्षिल से करीब 355 लोगों को नागरिक हेलीकॉप्टरों और वायुसेना की मदद से निकालकर मातली पहुंचाया गया है, जहां से उन्हें देहरादून भेजा जा रहा है।”
लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा ने कहा कि वर्तमान में तीन प्रमुख प्राथमिकताएं हैं:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लगातार तीन दिन धराली में डेरा डालकर राहत कार्यों की निगरानी की। उन्होंने बताया कि:
धराली के पास स्थित मुखबा और अन्य गांवों के स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक लापता लोगों की संख्या और भी अधिक हो सकती है। उनके अनुसार, घटना के समय निर्माणाधीन होटलों में नेपाल और बिहार के मजदूर कार्यरत थे, जो लापता हैं। इसके अलावा कई पर्यटक भी होटल में रुके हुए थे।
सड़कों के टूटने और भारी मलबे के कारण राहत सामग्री पहुंचाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए हवाई मार्ग पर ज्यादा निर्भरता है। सेना के दो चिनूक, दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर, और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के आठ हेलीकॉप्टर इस कार्य में लगे हैं। सेना ने संचार नेटवर्क सक्रिय किया है, जिससे बाहर निकाले गए लोगों ने अपने परिजनों से संपर्क कर उन्हें अपनी सुरक्षा की सूचना दी है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस आपदा से निपटने के लिए अपने एक माह का वेतन राहत कार्यों में दान करने की घोषणा की है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों और नागरिकों से आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास के लिए योगदान देने की अपील की।
निष्कर्ष
धराली आपदा ने उत्तराखंड के लिए एक बार फिर प्रकृति की भयावहता का गंभीर संदेश दिया है। राहत और बचाव कार्यों में सरकार, सेना और स्थानीय प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से हजारों लोगों की जान बचाई गई है, लेकिन लापता लोगों की खोज और पुनर्वास की चुनौती अभी बाकी है।
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