मैदानी इलाकों में क्यों नहीं फटता है बादल, क्यों मचाता है पहाड़ी इलाकों में तबाही?

आपने हाल के दिनों में भारत में बादल फटने की घटना के बारे में खूब सुना होगा। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हर साल मानसून के मौसम में कहीं न कहीं बादल फटता ही है। कभी सोचा है कि पहाड़ी इलाकों में ही बादल क्यों फटता है, मैदान इलाकों में क्यों नहीं? बादल फटने की घटना हमेशा पहाड़ी राज्यों में ही क्यों देखने को मिलती है। पहाड़ी इलाकों में बादल इसलिए फटते हैं क्योंकि वहां की भौगोलिक स्थिति और मौसम की खासियतें मिलकर ऐसी स्थिति बनाती हैं। जब नमी से भरे बादल पहाड़ों की ओर आते हैं, तो उन्हें ऊपर की ओर चढ़ना पड़ता है। जैसे-जैसे बादल ऊंचाई पर चढ़ते हैं, हवा ठंडी हो जाती है। ठंडी हवा में नमी संकुचित होकर पानी की बूंदों या हिम कणों के रूप में बदल जाती है, जिससे बादल भारी और गहरे हो जाते हैं।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Aug 5 2025, 17:00 IST
पहाड़ों पर क्यों फटता है बादलImage Credit : AI- Copilot/Meta01 / 07

पहाड़ों पर क्यों फटता है बादल

मैदानी इलाके और पहाड़ी इलाकों में बादलों के फटने और तबाही मचाने के कारणों को समझने के लिए हमें भौगोलिक, जलवायु और भौतिक कारणों को देखना होगा। पहाड़ी इलाकों में पहाड़ों की ऊंचाई और खड़ी ढलान होती है, जिससे बादल जब वहां से गुजरते हैं तो वे ऊंचाई पर चढ़ने को मजबूर होते हैं। इससे बादल में मौजूद नमी ठंडी होकर संघनित होती है और भारी बारिश या बादल फटने की घटना होती है। मैदानी इलाकों में ऐसी ऊंचाई नहीं होती, इसलिए बादल फटने की संभावना कम होती है। (फोटो- Copilot AI)

 ओरोग्राफिक बारिश (पहाड़ी बारिश)Image Credit : AI- Copilot/Meta02 / 07

ओरोग्राफिक बारिश (पहाड़ी बारिश)

पहाड़ी इलाकों में हवा जब पहाड़ों से टकराती है, तो वह ऊपर उठती है जिससे हवा ठंडी होकर नमी छोड़ती है। यह प्रक्रिया बादल में जल कणों की मात्रा बढ़ा देती है, जिससे भारी बारिश और बादल फटना संभव होता है। मैदानी इलाकों में हवा ऊपर उठने की जगह कम होती है, जिससे बारिश का दवाब कम होता है। (फोटो- Copilot AI)

जल निकासी और भू-स्थिरता की समस्याImage Credit : AI- Copilot/Meta03 / 07

जल निकासी और भू-स्थिरता की समस्या

पहाड़ों पर जल निकासी बहुत तेज होती है, जिससे भारी बारिश में पानी तेजी से बहता है और भूस्खलन, बाढ़ जैसी तबाही मचाता है। मैदानी इलाकों में पानी का बहाव धीमा होता है, जिससे पानी का जमाव और समतल वितरण होता है। (फोटो- Meta AI)

मौसम और तापमान में अंतरImage Credit : AI- Copilot/Meta04 / 07

मौसम और तापमान में अंतर

पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान अधिक अस्थिर होता है, खासकर दिन और रात के बीच। यह तापमान अस्थिरता बादलों में जल कणों को तेजी से संघनित और बरसाने में मदद करती है। मैदानी इलाकों में तापमान स्थिर रहता है, जिससे बादल फटने की संभावना कम होती है। (Copilot AI)

वनस्पति और भूमि संरचनाImage Credit : AI- Copilot/Meta05 / 07

वनस्पति और भूमि संरचना

पहाड़ी इलाकों में वन कम घने या कमजोर हो सकते हैं, जिससे भारी बारिश में मिट्टी की रक्षा कम होती है। मैदानी इलाकों में वनस्पति और फसलें मिट्टी को बांधे रखती हैं, जिससे बाढ़ और कटाव कम होता है। (फोटो-Socio Pulse AI)

बादल फटने की भौतिक प्रक्रियाImage Credit : AI- Copilot/Meta06 / 07

बादल फटने की भौतिक प्रक्रिया

बादल फटना तब होता है जब बादल में जल की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है और वह अचानक एकत्रित पानी को गिरा देता है। पहाड़ी इलाके में ऊंचाई के कारण हवा का दबाव कम होता है, जिससे बादल भारी मात्रा में नमी लेकर अचानक टूट सकते हैं। मैदानी इलाके में हवा का दबाव स्थिर होने से बादल फटना कम होता है और बारिश धीरे-धीरे होती है। (फोटो- Meta AI)

मानव गतिविधियां और प्रदूषणImage Credit : AI- Copilot/Meta07 / 07

मानव गतिविधियां और प्रदूषण

पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध खनन, पेड़ कटाई और अव्यवस्थित निर्माण से भूमि अस्थिर हो जाती है। ये गतिविधियां भारी बारिश के दौरान बादल फटने पर तबाही को बढ़ा देती हैं। मैदानी इलाकों में भले ही प्रदूषण हो, पर भूमि स्थिरता के कारण तबाही कम होती है। (फोटो- Socio Pulse AI)

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