नेशनल हेराल्ड केस में नई FIR दर्ज (PTI)
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नेशनल हेराल्ड मामले में एक नई FIR दर्ज की है। FIR में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के अलावा छह और नाम शामिल हैं। ED मुख्यालय द्वारा EOW में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह FIR दर्ज की गई है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नई FIR दर्ज की है। इस FIR में उनके साथ छह अन्य लोगों और तीन कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि कांग्रेस से जुड़ी कंपनी AJL (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) को धोखाधड़ी से अपने कब्जे में लेने के लिए आपराधिक साजिश की गई। यह FIR तीन अक्टूबर को ईडी की शिकायत पर दर्ज हुई है। ईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के साथ शेयर की थी। PMLA की धारा 66(2) के तहत ED किसी एजेंसी से अनुसूचित अपराध दर्ज करने को कह सकती है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने तीन अक्टूबर को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और सात अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। पुलिस ने प्राथमिकी में भारतीय दंड विधान की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), धारा 403 (संपत्ति का दुरुपयोग), धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात के लिए दंड) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप लगाए हैं, जिसमें गांधी परिवार, कांग्रेस नेता सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के अलावा यंग इंडियन (वाईआई) और डोटेक्स मर्चेंडाइज लिमिटेड जैसे प्रतिष्ठानों, डोटेक्स के प्रवर्तक सुनील भंडारी, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) और अन्य अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं।
अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत में दाखिल ईडी के आरोपपत्र में भी इन प्रतिष्ठानों का नाम आरोपी के तौर पर दर्ज है। अदालत ने अभी तक इस पर संज्ञान नहीं लिया है और अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित है। कांग्रेस ने बार-बार इस जांच को प्रतिशोध की रणनीति बताया और ईडी को भाजपा का गठबंधन सहयोगी करार दिया था। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66 (2) के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल किया। यह धारा संघीय एजेंसी को कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए साक्ष्य साझा करने की अनुमति देती है, ताकि वह जांच को आगे बढ़ाने के लिए धन शोधन का मामला दर्ज कर सके।
सूत्रों ने बताया कि प्राथमिकी ईडी के मामले और आरोपपत्र को मजबूत करने का काम करेगी। यह मामला दिल्ली के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश से संबंधित है, जिसने 26 जून 2014 को नेशनल हेराल्ड के मामलों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर संज्ञान लिया था। प्राथमिकी में ईडी द्वारा चार सितंबर को ईओडब्ल्यू को भेजे गए पत्र में लगाए गए आरोपों का संज्ञान लिया गया है। ईडी के पत्र की विषय-वस्तु केंद्रीय एजेंसी द्वारा अपने आरोपपत्र में किए गए दावों के समान है।
ईडी ने अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया था कि कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों द्वारा एक आपराधिक साजिश रची गई थी, जिसमें सोनिया गांधी, उनके सांसद पुत्र राहुल गांधी के अलावा दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस तथा दुबे, पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन शामिल हैं। इन पर एजेएल की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों के अधिग्रहण से संबंधित धन शोधन में संलिप्त होने का आरोप है। एजेएल नेशनल हेराल्ड समाचार मंच (समाचार पत्र और वेब पोर्टल) का प्रकाशक है और इसका स्वामित्व यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के पास है।
सोनिया गांधी
राहुल गांधी
सैम पित्रोदा (इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख)
और तीन अन्य लोग
साथ ही तीन कंपनियां AJL, यंग इंडियन (Young Indian), डोटेक्स मर्केंडाइज प्रा. लि. (Dotex Merchandise Pvt Ltd) का भी इसमें नाम है। डोटेक्स कोलकाता की कथित शेल कंपनी बताई जाती है, जिसने यंग इंडियन को ₹1 करोड़ दिए थे। आरोप है कि इस लेन-देन की मदद से यंग इंडियन ने कांग्रेस को 50 लाख रुपये देकर करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति वाली AJL पर नियंत्रण पा लिया था।
ईडी ने इन नेताओं पर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। यह कंपनी ही असल में नेशनल हेराल्ड अखबार पब्लिश करती थी। कोर्ट ने 14 जुलाई को बहस पूरी होने के बाद फैसला 29 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रखा था। इसके बाद 8 अगस्त और 29 नवंबर को फैसला टला। अब कोर्ट 16 दिसंबर को फैसला सुनाएगी।
साल 1938 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना की थी। इस अखबार का मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) के पास था जो हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज नाम से दो और अखबार छापती थी। 1956 में एजेएल को गैर व्यावसायिक कंपनी के तौर पर स्थापित किया गया और कंपनी एक्ट धारा 25 से कर मुक्त कर दिया गया। कंपनी धीरे-धीरे घाटे में चली गई। कंपनी पर 90 करोड़ का कर्ज भी चढ़ गया। इसी बीच साल 2008 में वित्तीय संकट के बाद इसे बंद करना पड़ा, जहां से इस विवाद की शुरुआत हुई।
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