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शराब घोटाला: अब इस कारोबारी को मिली जमानत, सिसोदिया के करीबियों में होती है गिनती; जानें पूरा माजरा

Delhi Sharab Ghotala Case: आबकारी नीति मामले में दिल्ली की अदालत ने कारोबारी अमित अरोड़ा को जमानत दे दी है। इस मामले में फिलहाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के. कविता और अन्य लोग न्यायिक हिरासत में हैं। जानें कोर्ट ने क्या कहा।

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मनीष सिसोदिया के करीबी को मिली अंतरिम जमानत।

Photo : Times Now Digital

Delhi News: दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से संबंधित धनशोधन के एक मामले में गुरुग्राम स्थित ‘बड्डी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक अमित अरोड़ा को दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश (ईडी एवं सीबीआई मामले) कावेरी बावेजा ने छह जून को जारी एक आदेश में कहा कि आरोपी की पत्नी का ऑपरेशन हुआ है और उसे उसकी देखभाल करने की जरूरत है।

किस आधार पर कारोबारी को मिली जमानत?

इस मामले में फिलहाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के. कविता और अन्य लोग न्यायिक हिरासत में हैं। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी के वकील विकास पाहवा ने दलील दी है कि आरोपी की पत्नी के पिता पहले ही गुजर चुके हैं जबकि उनकी मां करीब 72 साल की हैं तथा पंजाब के मोहाली में रहती हैं और उनके दो भाई बेंगलुरु तथा ब्रिटेन के लंदन में हैं।

अरोड़ा के लिए अदालत ने कही ये बड़ी बात

न्यायाधीश ने कहा कि परिवार का कोई भी और सदस्य या चचेरा/मौसेरा/ ममेरा भाई/बहन घर में या आसपास भी नहीं रहता है या वह बमुश्किल ही आरोपी की पत्नी एवं उसके बच्चों की देखभाल के लिए उसके घर आता-जाता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा दूर के रिश्तेदार पति/पिता की अनुपस्थिति को पूरा नहीं कर सकते और आवेदक के परिवार के सदस्यों की अच्छी तरह देखभाल नहीं कर सकते।

दो लाख रुपये के निजी मुचलके पर मिली जमानत

अदालत ने कहा, 'दलीलों पर विचार करने तथा आवेदक की पत्नी के चिकित्सा दस्तावेजों, उसके दो बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति, जैसा कि बताया गया है, समेत इस मामले के रिकॉर्ड पर गौर करने तथा इस तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए कि आवेदक या उसकी पत्नी के परिवार में कोई ऐसा अन्य व्यक्ति नहीं है जो ऑपरेशन के बाद की जरूरी देखभाल कर सके, आवेदन मंजूर किया जाता है।' न्यायाधीश ने दो लाख रुपये के निजी बॉण्ड और इतनी ही राशि के एक मुचलके पर आरोपी को यह राहत दी।

सिसोदिया का करीबी है अमित अरोड़ा- CBI

अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी तब तक दिल्ली-एनसीआर से बाहर नहीं जाएगा जब तक कि उसकी पत्नी के इलाज के सिलसिले में यह जरूरी न हो। अरोड़ा को 29 नवंबर, 2022 को धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। ईडी का धनशोधन मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी पर आधारित है। सीबीआई ने दावा किया था कि अरोड़ा सिसोदिया का करीबी है और वे दोनों शराब लाइसेंस से मिली अवैध धनराशि के ‘‘प्रबंधन एवं इसे इधर-उधर करने’’ में सक्रियता से शामिल थे।

(इनपुट- भाषा)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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