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Swati Maliwal Case: स्वाति मालीवाल से मारपीट मामले में बिभव कुमार को नहीं मिली राहत, 22 जून तक बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत

Swati Maliwal Case: स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने बिभव कुमार की न्यायिक हिरासत को 22 जून तक बढ़ा दिया है। बिभव कुमार को फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं, उन्हें वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था।

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Bibhav Kumar- Swati Maliwal

Photo : BCCL

Swati Maliwal Case: राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट मामले में अरविंद केजरीवाल के पीए बिभव कुमार को राहत मिलती नहीं दिख रही है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने बिभव कुमार की न्यायिक हिरासत को 22 जून तक बढ़ा दिया है। बिभव कुमार को फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं, उन्हें वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था।

बता दें, स्वाति मालीवाल ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 13 मई को बिभव कुमार पर नई दिल्ली में मुख्यमंत्री के आवास पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। इससे पहले शुक्रवार को अदालत ने जांच अधिकारी की अनुपस्थिति को देखते हुए कुमार की हिरासत एक दिन के लिए बढ़ा दी थी।

18 मई को हुई थी गिरफ्तारी

बिभव कुमार को 18 मई को गिरफ्तार किया गया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें उसी दिन पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। अदालत ने कहा था कि उनकी गिरफ्तारी के कारण अग्रिम जमानत याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्हें 24 मई को चार दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसके बाद उन्हें फिर से तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। पुलिस की ओर से बिभव कुमार के खिलाफ 16 मई को दर्ज की गई प्राथमिकी में आपराधिक धमकी देना, महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग तथा गैर इरादतन हत्या का प्रयास करने से संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं।
Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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