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दिल्ली 2020 दंगा: 'तख्ता पलट' की साजिश से जुड़े 10 बड़े खुलासे, उमर खालिद की जमानत हुई नामुमकिन

दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे कहा है कि जांच में मिले चश्मदीद, दस्तावेजी और तकनीकी सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि दंगे एक गहरी साम्प्रदायिक साजिश के तहत रचे गए थे। हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद पर भी गंभीर आरोप लगाया है और उसे इन दंगों का 'मास्टरमाइंड' बताया है।

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साल 2020 में हुए थे दिल्ली में दंगे।

Photo : PTI

Delhi Riots 2025 : दिल्ली में 2020 में हुए दंगों पर दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया। इस हलफनामे में पुलिस ने दंगे के आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस का कहना है कि ये दंगे 'स्वाभाविक' नहीं थे। दंगों का मकसद देश में शांति एवं सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि खराब करना था। पुलिस ने कहा है कि जांच में मिले चश्मदीद, दस्तावेजी और तकनीकी सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि दंगे एक गहरी साम्प्रदायिक साजिश के तहत रचे गए थे। हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद पर भी गंभीर आरोप लगाया है और उसे इन दंगों का 'मास्टरमाइंड' बताया है।

1.'रिजीम चेंज ऑपरेशन' शब्द का पहली बार इस्तेमाल

खास बात यह है कि दिल्ली पुलिस ने दंगा मामले में पहली बार 'रिजीम चेंज ऑपरेशन' शब्द का इस्तेमाल किया है। दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा है कि 'नागरिक प्रदर्शन की आड़ में एक चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए एक सुनियोजित रिजीम चेंज ऑपरेशन तैयार किया गया था।' हलफनामे के मुताबिक CAA विरोध के नाम पर देश की सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करने की संगठित कोशिश की गई।

2.CAA विरोध एक बहाना, असली मकसद व्यवस्था को अस्थिर करना

सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे के पेज 23 से 27 पर पुलिस ने विस्तार से बताया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का विरोध 'टूल ऑफ पॉलिटिकल एजिटेशन' के रूप में इस्तेमाल हुआ। हलफनामे के मुताबिक, प्रदर्शन के पीछे छिपा वास्तविक उद्देश्य भारत की संवैधानिक सरकार की वैधता को चुनौती देना था। पुलिस का कहना है कि नारे, सोशल मीडिया अभियानों और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से आंदोलन को व्यवस्था विरोधी अभियान में बदला गया।

3.डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तैयार हुआ शासन परिवर्तन का ब्लूप्रिंट

हलफनामे के पेज 42 से 44 में दर्ज है कि जांच के दौरान पुलिस को कई डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिसमें व्हाट्सऐप ग्रुप, गूगल डॉक, ईमेल, और सोशल मीडिया चैट्स, जिनमें 'रिजीम डिस्टैबिलाइजेशन ब्लूप्रिंट' जैसा प्लान तैयार किया गया था। पुलिस का दावा है कि डिजिटल चैट्स में सरकार को झुकाने और राजनीतिक संकट पैदा करने की बात खुलकर की गई।

4.देशभर में हिंसा का एक जैसा पैटर्न

हलफनामे में कहा गया है कि दिल्ली दंगे कोई अलग-थलग घटना नहीं थे। पुलिस ने कहा कि इसी तरह के उपद्रव एवं हिंसा की साजिश उत्तर प्रदेश, असम, केरल और बंगाल में रची गई। इससे यह साबित होता है कि आंदोलन का मकसद केवल स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि देश भर में व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ा आंदोलनकारी नेटवर्क खड़ा करना था।

5.अंतरराष्ट्रीय प्रचार के जरिए भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश

हलफनामे के पेज 85 से 90 में दिल्ली पुलिस ने 'ग्लोबल कम्पेन एंड नरेटिव बिल्डिंग' शीर्षक के तहत दावा किया है कि विदेशी मीडिया और NGO नेटवर्क ने भारत की छवि को 'इस्लामोफोबिक स्टेट' के रूप में पेश करने का प्रयास किया। पुलिस ने लिखा, 'हिंसा के लिए समर्थन स्वाभाविक नहीं था बल्कि एक गढ़े गए मीडिया वार के जरिए भारत की सम्प्रभु छवि धूमिल करने की साजिश थी।'

6. 'कलर रिवोल्यूशन पैटर्न' का हवाला

दिल्ली पुलिस ने पेज 86 पर 'कलर रिवोल्यूशन मॉडल' का उल्लेख किया है। यानी वही रणनीति जो कई देशों में तख्तापलट के लिए इस्तेमाल की जाती है। पुलिस का कहना है कि दिल्ली में हुआ आंदोलन भी उसी मॉडल का भारत संस्करण था। दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में लिखा है कि 'राजनीतिक दबाव बढ़ाने और प्रशासनिक लाचारी पैदा कराने के लिए नागरिक प्रदर्शनों को इस्तेमाल हथियार के रूप में हुआ।'

7. वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क विदेशी फंडिंग से जुटा

तकरीबन 6 पन्नों के बीच पुलिस ने बताया कि आंदोलन को चलाने के लिए जो फंडिंग हुई, वह 'NGOs और विदेशी दानकर्ताओं से छोटे आकार में आई जिनका पता लगाना मुश्किल था। इन पैसों का उपयोग प्रदर्शनों के लिए साजो-सामान जुटाने, सोशल मीडिया की कवरेज और स्थानीय लोगों को जुटाने में हुआ। पुलिस ने कहा कि इन गतिविधियों का उद्देश्य प्रशासन को चुनौती देना था, न कि किसी नीति पर शांतिपूर्ण विरोध।

8. अभियुक्तों ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया

दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में कहा कि कई अभियुक्तों ने अदालत की प्रक्रिया को जानबूझकर बाधित किया ताकि मुकदमे में देरी हो। हलफनामे के मुताबिक, 'गैर-जरूरी अर्जियों एवं बार-बार स्थगन के जरिए जानबूझकर प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया गया।' यह दर्शाता है कि वे 'लंबी कानूनी लड़ाई' चला रहे हैं, जो राजनीतिक आंदोलनों की एक सामान्य रणनीति होती है।

9. दंगे की साजिश राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा

सुप्रीम कोर्ट में सौंपे गए हलफनामे के पेज 116-120 में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि यह साजिश भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिक प्रशासन एवं लोकतांत्रिक एकता पर पर सीधा हमला थी। हलफनामे में लिखा है कि 'ऐसे सुनियोजित आंदोलन व्यवस्था परिवर्तन के आधुनिक उपकरण हैं, इनका उद्देश्य सरकारी संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करना होता है।' यानी दिल्ली पुलिस के अनुसार यह केवल हिंसा नहीं थी, बल्कि संविधानिक व्यवस्था को हिलाने का प्रयास था।

10. सुप्रीम कोर्ट से अपील- इसे सामान्य दंगा नहीं, राष्ट्रीय साजिश माना जाए

हलफनामे के आखिरी हिस्से में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इस मामले को सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या न माना जाए। उन्होंने लिखा कि यह कोई अकेला या अलग-थलग दंगा नहीं है, बल्कि लोगों की अशांति को हथियार बनाकर शासन परिवर्तन की एक सुनियोजित कोशिश है। पुलिस ने कोर्ट से राजनीतिक असहमति और संगठित ष्डयंत्र के बीच स्पष्ट रेखा खींचने का आग्रह किया है।

आखिर 'रिजीम चेंज' शब्द क्यों अहम है?

आम तौर पर 'रिजीम चेंज ऑपरेशन' विदेश नीति और खुफिया विश्लेषण में इस्तेमाल होता है, जब किसी देश की सरकार को गिराने या अस्थिर करने की साजिश रची जाती है। दिल्ली पुलिस ने इस शब्द का प्रयोग करते हुए संकेत दिया है कि 2020 की हिंसा को वे केवल दंगा नहीं, बल्कि राजनीतिक-रणनीतिक युद्ध के रूप में देख रहे हैं।

शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि दिल्ली पुलिस का यह 'रिजीम चेंज ऑपरेशन' वाला तर्क महज बयानबाजी है या उसके पीछे ठोस साक्ष्य हैं। उमर खालिद समेत अन्य अभियुक्तों का कहना है कि उन्होंने किसी भी हिंसा में भाग नहीं लिया और यह सब राजनीतिक असहमति को दबाने की कोशिश है। वहीं, पुलिस का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क इस साजिश को सिद्ध करते हैं।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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