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स्वदेशी की मेरी परिभाषा है कि पैसा कोई भी लगाए, लेकिन काम भारतीय करें : PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि स्वदेशी हर किसी का जीवन मंत्र होना चाहिए। मोदी ने साथ ही कहा कि उनकी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने वैश्विक एवं घरेलू दोनों विनिर्माताओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो -PTI)

अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि स्वदेशी हर किसी का जीवन मंत्र होना चाहिए। मोदी ने साथ ही कहा कि उनकी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने वैश्विक एवं घरेलू दोनों विनिर्माताओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। गुजरात के हंसलपुर विनिर्माण संयंत्र से मारुति सुजुकी के पहले इलेक्ट्रिक वाहन ई-विटारा को मंगलवार को हरी झंडी दिखाने के बाद मोदी ने कहा कि दुनिया भारत में बने इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाएगी।

मोदी ने लोगों से केवल स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आग्रह किया और कहा कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि निवेश कौन करता है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि उत्पाद बनाने में भारतीयों की कड़ी मेहनत हो। उन्होंने कहा कि इस तरह मारुति सुजुकी भी एक स्वदेशी कंपनी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी हर भारतीय का जीवन मंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की मेरी परिभाषा यह है कि पैसा कोई भी लगाए, लेकिन काम भारतीय करें।

मेक इन इंडिया पर बोले पीएम

मोदी ने कहा कि आज ‘मेक इन इंडिया’ के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि देश में बने ई-वाहनों का निर्यात 100 देशों में किया जाएगा। दुनिया भारत में बने इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाएगी। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने वैश्विक और घरेलू दोनों विनिर्माताओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन में 500 प्रतिशत, मोबाइल उत्पादन में 2,700 प्रतिशत और रक्षा उत्पादन में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

भारत के पास कुशल कार्यबल का एक बहुत बड़ा भंडार

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास लोकतंत्र की ताकत, जनसांख्यिकी का लाभ और कुशल कार्यबल का एक बहुत बड़ा भंडार है। उन्होंने कहा कि यह हमारे सभी साझेदारों के लिए लाभकारी है। मोदी ने कहा कि आज सुजुकी जापान भारत में विनिर्माण कर रही है और यहां बनाई गई कारों का निर्यात जापान को किया जा रहा है। यह न केवल भारत और जापान के बीच संबंधों की मजबूती का प्रतीक है, बल्कि देश पर विश्व के विश्वास को भी दर्शाता है।

भारत पर पूरी दुनिया की नजर

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। ऐसे समय में किसी भी राज्य को पीछे नहीं रहना चाहिए। हर राज्य को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आने वाले निवेशक यह सोचने पर मजबूर हो जाने चाहिए कि आखिर वह किस राज्य का रुख करें। मैं सभी राज्यों को सुधारों, विकासोन्मुखी नीतियों और सुशासन में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आमंत्रित करता हूं। उन्होंने कहा कि भारत यहीं नहीं रुकने वाला। हमने जिन क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया है, उनमें हमारा लक्ष्य और बेहतर प्रदर्शन करना है। इसीलिए हम ‘मिशन मैन्युफैक्चरिंग’ पर जोर दे रहे हैं। आने वाले समय में हमारा ध्यान भविष्य के उद्योगों पर होगा। मोदी ने कहा कि देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

(भाषा इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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