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विजयादशमी पर जवानों के बीच पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ, सीमा पार चीनी चौकियों का लिया जायजा, की शस्त्र पूजा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 24, 2023, 12:12 PM IST

Rajnath Singh: राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा, आप ने सीमाओं को सुरक्षित बना रखा है इसी कारण भारत की अंतर्राष्ट्रीय जगत में प्रतिष्ठा बड़ी तेजी से बढ़ रही है। राजनाथ सिंह ऐसे समय में तवांग पहुंचे हैं, जब चीन और भारतीय सेनाओं के बीच तनातनी की स्थिति है। बता दें, चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बता रहा है, लेकिन भारत इसे लगातार खारिज कर रहा है।

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राजनाथ सिंह

Photo : ANI

Rajnath Singh: विजयादशमी और दशहरे के मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भारतीय सेना के जवानों के बीच पहुंचे। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में जवानों के साथ विजयादशमी का पर्व मनाया और शस्त्र पूजन भी किया। इस दौरान उन्होंने सीमा पार चीनी चौकियों का भी जायजा लिया।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तवांग में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि 4 साल पहले मैं यहां आया था, मेरी इच्छा हुई कि विजयादशमी के पावन अवसर पर मैं अपने बहादुर जवानों के बीच आकर शुभकामनाएं दूं। मैं आप सभी को विजयादशमी की बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। LAC के पास तक जाकर मैंने देखा है, जिन कठिन परिस्थितियों में आप देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं उसकी जितनी भी सराहना की जाए वो कम है।

आप लोगों ने सीमाओं को सुरक्षित बनाया

राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा, आप ने सीमाओं को सुरक्षित बना रखा है इसी कारण भारत की अंतर्राष्ट्रीय जगत में प्रतिष्ठा बड़ी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, अगर आप लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को सुरक्षित नहीं रखा होता तो अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत का आज जो कद बना है, ये कद न बना होता। लोग ये मान रहे हैं कि भारत आर्थिक तौर पर मजबूत हो रहा है साथ ही भारत की सैन्य शक्ति भी बढ़ी है।

अहम है राजनाथ का तवांग दौरा

राजनाथ सिंह का अरुणाचल प्रदेश का तवांग दौरा काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, राजनाथ सिंह ऐसे समय में तवांग पहुंचे हैं, जब चीन और भारतीय सेनाओं के बीच तनातनी की स्थिति है। बता दें, चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बता रहा है, लेकिन भारत इसे लगातार खारिज कर रहा है। बीते साल चीन के विदेश मंत्री ने भारत के साथ तवांग को लेकर बातचीत की भी पेशकश की थी। हालांकि, भारत ने इस मामले में किसी भी तरह का समझौता करने से इंनकार कर दिया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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