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रामचरितमानस पर विवाद: स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में उतरीं BJP की ये सांसद

  • Written by: रामानुज सिंह
  • Updated Jan 26, 2023, 04:39 PM IST

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने रामचरितमानस (Ramcharitmanas) के कुछ हिस्सों को कुछ जातियों के लिए अपमानजनक बताया। इसपर उनकी बेटी और बजेपी सांसद संघमित्रा मौर्य कहा कि इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए और इस पर चर्चा की जानी चाहिए।

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सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य

Photo : Twitter

हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने कहा था कि रामचरित्रमानस (Ramcharitmanas) के कुछ हिस्सों में कुछ जातियों और संप्रदायों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और कटाक्ष हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए। उसके बाद उनके बयानों को लेकर उन्हें निशाना बनाया जाने लगा कि वह भगवान राम के खिलाफ हैं। इसी बीच उनकी बेटी और बीजेपी सांसद संघमित्रा मौर्य (Sanghamitra Maurya) ने कहा कि उनका बयान विवाद का नहीं, चर्चा का विषय है। विश्लेषण किया जाना चाहिए और चर्चा की जानी चाहिए कि रामचरित्रमानस की एक खास लाइन पर बार-बार विवाद क्यों हो रहा है? कुछ लोग अनावश्यक मुद्दों को उठा रहे हैं और अशांति पैदा करने के लिए विवाद खड़ा कर रहे हैं।

संघमित्रा मौर्य बुधवार को अपने पिता और समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस पर उनकी टिप्पणी के समर्थन में आईं और कहा कि हिंदू महाकाव्य के कुछ हिस्सों पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के जिस चौपाई (श्लोक) को उनके पिता ने आपत्तिजनक बताया है, उसकी चर्चा विद्वानों से करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने रामचरितमानस पढ़ी है। हालांकि, इस संबंध में मेरी उनसे बात नहीं हुई है। लेकिन अगर उन्होंने एक चौपाई का जिक्र किया है तो शायद इसलिए कि वह पंक्ति स्वयं भगवान राम के चरित्र के विपरीत है। रामचरितमानस पर अपने पिता की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर बदायूं से बीजेपी सांसद ने मीडिया से कहा कि जब भगवान राम ने जाति को महत्व दिए बिना शबरी के बेर खाए, तो उस चौपाई में उनकी जाति का वर्णन किया गया है। स्वामी प्रसाद मौर्य पर उनकी विवादित टिप्पणी के लिए मामला दर्ज किया गया है।

संघमित्रा ने कहा कि उनके पिता ने विशेष श्लोक उद्धृत किया क्योंकि उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा था। इसलिए, हमें लगता है कि एक स्पष्टीकरण होना चाहिए। यह मीडिया में बहस का विषय नहीं है। हमें लगता है कि यह विश्लेषण का विषय है। उन्होंने कहा कि इस पर विद्वानों से चर्चा की जानी चाहिए। जब हम ईश्वर के विपरीत कुछ पाते हैं, तो हमें एक स्पष्टीकरण की आवश्यकता होती है। संघमित्रा ने दावा किया कि महान कवयित्री महादेवी वर्मा की एक कविता में भी इस चौपाई को लेकर सवाल किया गया था, उन्होंने भी कहा था कि वह हैरान हैं कि किसी महिला ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। उन्होंने कहा कि वह (मौर्य) मेरे पिता हैं, मैं उनका बचाव नहीं कर रही हूं, बल्कि मैं कह रही हूं कि अगर कोई व्यक्ति कुछ भी बात करता है, तो हमें तब तक कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए जब तक हम उसकी बात को पूरी तरह से समझ नहीं लेते।

उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में रामचरितमानस के कुछ छंदों पर जाति के आधार पर समाज के एक बड़े वर्ग का "अपमान" करने का आरोप लगाकर एक विवाद खड़ा कर दिया और मांग की कि इन पर प्रतिबंध लगाया जाए। रामचरितमानस, अवधी भाषा की एक महाकाव्य कविता है, जो रामायण पर आधारित है और इसकी रचना 16वीं शताब्दी के भक्ति कवि तुलसीदास ने की है।

रामानुज सिंह
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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