अध्यात्म

Hal Chhath Mata Photo: हलछठ माता का चित्र कैसे बनाएं, जानें तालाब, टहनियों और पारंपरिक प्रतीकों का महत्व

Hal Chhath Mata Photo, Image, Picture: हलछठ माता का चित्र कैसे बनाएं? जानें हलछठ पूजा के लिए मिट्टी का तालाब बनाने, कुश-कांस की टहनियां लगाने और दीवार पर गाय, बछड़ा, हल व संतान के चित्र बनाने की विधि।

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हरछठ माता का फोटो, देखें हल छठ मां का चित्र कैसे बना सकते हैं

Hal Chhath Mata Photo, Image, Picture: हलछठ का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। इसे हलषष्ठी, हरछठ, ललही छठ और बलराम जयंती जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं केवल व्रत ही नहीं रखतीं, बल्कि पूजा के लिए हलछठ माता का विशेष स्वरूप भी तैयार करती हैं।

हलछठ माता की पूजा में किसी भव्य मूर्ति की जरूरत नहीं होती। मिट्टी से बना छोटा तालाब, कुछ टहनियां और दीवार पर बने सरल चित्र ही पूजा स्थल को पूरा कर देते हैं। यही सादगी इस व्रत को लोक परंपराओं से जोड़ती है।

हलछठ माता का चित्र बनाने की तैयारी

घर में किसी साफ और शांत स्थान को पूजा के लिए चुनें। पहले वहां अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद गंगाजल या साफ पानी छिड़ककर स्थान को शुद्ध कर लें। पूजा की तैयारी करते समय मन में हलछठ माता का ध्यान करें।

पूजा स्थल पर ये चीजें रखी जा सकती हैं:

  • साफ मिट्टी
  • थोड़ा पानी
  • कुश
  • कांस की टहनी
  • पलाश की टहनी
  • झरबेरी की टहनी
  • गेरू या हल्दी
  • रोली और चावल
  • पूजा का छपा हुआ चित्र, यदि उपलब्ध हो

हर क्षेत्र में पूजा की सामग्री थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए परिवार की पुरानी परंपरा को पहली प्राथमिकता देना बेहतर रहता है।

मिट्टी से हलछठ माता कैसे बनाएं

पूजा के स्थान पर साफ मिट्टी से गोल या चौकोर आकार का एक छोटा तालाब बनाएं। इसके किनारों को थोड़ा ऊंचा रखा जा सकता है। बीच में थोड़ी-सी जगह छोड़कर उसमें जल भरें। कई घरों में इसे सगरी या सगरा भी कहा जाता है।

इस प्रतीकात्मक तालाब के किनारे कुश, कांस, पलाश और झरबेरी की टहनियां लगाई जाती हैं। इन टहनियों को एक साथ बांधकर भी रखा जा सकता है। स्थानीय मान्यताओं में इसी प्राकृतिक स्वरूप को हलछठ माता का प्रतीक माना जाता है।

यह पूजा हमें प्रकृति, जल, पेड़-पौधों और कृषि जीवन से जुड़ने का संदेश देती है। मिट्टी का तालाब जीवन और पोषण का प्रतीक है, जबकि हरी टहनियां संतान की वृद्धि और खुशहाली की कामना को दर्शाती हैं।

दीवार पर हलछठ माता का चित्र कैसे बनाएं

कई क्षेत्रों में पूजा स्थल के पास की दीवार पर हलछठ माता से जुड़े चित्र बनाए जाते हैं। इसके लिए गेरू, हल्दी, चावल के घोल या प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जा सकता है। चित्र बहुत सुंदर या कलात्मक हो, यह जरूरी नहीं। इसके पीछे की भावना अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

दीवार पर सामान्यतः ये चित्र बनाए जाते हैं-

  • गाय और उसका बछड़ा
  • हल और किसान
  • खेत या अनाज की बालियां
  • नेवला
  • तालाब और पेड़
  • मां और संतान
  • सूर्य और चंद्रमा

कुछ परिवारों में छह छोटे पुतले या संतान के प्रतीक भी बनाए जाते हैं। गाय और बछड़े का चित्र मातृत्व और ममता से जोड़ा जाता है। हल और किसान खेती तथा अन्न उत्पादन का संकेत देते हैं। संतान से जुड़े चित्र उसके स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की प्रार्थना को व्यक्त करते हैं।

क्या बाजार से खरीदा चित्र लगा सकते हैं

यदि मिट्टी का स्वरूप या दीवार पर चित्र बनाना संभव नहीं है, तो बाजार से मिलने वाला हलछठ माता का छपा हुआ चित्र लगाया जा सकता है। मोबाइल से चित्र देखकर उसे कागज पर भी बनाया जा सकता है। पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा और साफ मन का ही माना जाता है।

हालांकि संभव हो तो छपे हुए चित्र के साथ मिट्टी का छोटा तालाब और पारंपरिक टहनियां जरूर रखें। इससे पूजा का लोक रूप बना रहता है और नई पीढ़ी भी इस परंपरा को करीब से समझ पाती है।

हलछठ माता का चित्र बनाते समय ध्यान रखें

पूजा की तैयारी स्नान करने और साफ कपड़े पहनने के बाद करें। टहनियां तोड़ते समय पौधे को नुकसान न पहुंचाएं। यदि कोई सामग्री आसानी से उपलब्ध न हो, तो घर की बुजुर्ग महिलाओं या पुरोहित से पूछकर स्थानीय विकल्प अपनाएं। अलग-अलग प्रदेशों में हलछठ पूजा की विधि बदल सकती है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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