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Video: स्वामी प्रसाद मौर्य बोले- रामचरितमानस में पिछड़ों और दलितों का अपमान, VHP ने कहा- वो अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं

  • Written by: रामानुज सिंह
  • Updated Jan 22, 2023, 11:27 PM IST

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने रामचरितमानस (Ramcharitmanas) में विशेष जातियों और संप्रदायों पर लक्षित अपमानजनक टिप्पणियों और कटाक्ष को हटाने की मांग की। इस पर विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि स्वामी प्रसाद अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उनकी तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने रविवार को महाकाव्य रामायण पर आधारित कविता रामचरितमानस (Ramcharitmanas) में विशेष जातियों और संप्रदायों पर लक्षित अपमानजनक टिप्पणियों और कटाक्ष को हटाने की मांग की। एएनआई से बात करते हुए, सपा नेता ने कहा कि मुझे रामचरित्रमानस के साथ कोई समस्या नहीं है, लेकिन इसके कुछ हिस्सों में विशेष जातियों और संप्रदायों पर अपमानजनक टिप्पणियां और कटाक्ष हैं। उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। मौर्य ने आगे दावा किया कि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में दलित समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शब्द हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उसे यह देखना चाहिए कि किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों। मौर्य ने पिछले साल जनवरी में सत्तारूढ़ बीजेपी छोड़ दी थी और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए।

VHP ने की Swami Prasad Maurya की गिरफ्तारी की मांग

VHP (विश्व हिंदू परिषद) ने समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वामी प्रसाद अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और वो राम भक्तों पर गोली चलवाने वालों के साथ हैं। इन पर तत्काल प्रतिबंध लगना चाहिए। इनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार से मांग है इन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाए। इनपर कार्रवाई होनी चाहिए। इन्होंने धर्मग्रंथ पर आरोप लगाया है, धर्मग्रंथ की निंदा की है। रामचरित्रमानस से जन-जन प्ररेणा लेता है। ऐसे धर्म ग्रंथ पर उंगली उठाने वाले मानसिक विक्षिप्त की गिरफ्तारी आवश्यक है।

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने भी Ramcharitmanas को बताया था विभाजनकारी

इस महीने की शुरुआत में, बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने अपने बयान से एक विवाद खड़ा कर दिया था कि रामचरितमानस विभाजनकारी है और समाज में नफरत फैलाता है। इस टिप्पणी से हिंदू धार्मिक नेताओं और भाजपा में आक्रोश फैल गया, जिसने सरकार से उनकी बर्खास्तगी की मांग की। नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के 15वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर ने रामचरितमानस और मनुस्मृति को समाज को बांटने वाली किताब बताया था। मंत्री ने कहा कि मनुस्मृति को क्यों जलाया गया? ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें समाज के एक बड़े वर्ग के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई है। रामचरितमानस का विरोध क्यों किया गया? ऐसा इसलिए है क्योंकि यह निम्न जाति के लोगों के शिक्षा के अधिकार के खिलाफ बोलती है। यह कहता है कि निम्न जाति के लोग बारी-बारी से अगर वे शिक्षा प्राप्त करते हैं तो जहरीला हो जाता है, जैसे सांप दूध पीने के बाद जहरीला हो जाता है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति, रामचरितमानस, गुरु गोलवलकर की बंच ऑफ थॉट्स... ये किताबें ऐसी किताबें हैं जो नफरत फैलाती हैं। नफरत से देश महान नहीं बनेगा, प्यार देश को महान बनाएगा।

रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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