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'रेलवे की नाकामी और सरकार की लापरवाही...', राहुल गांधी ने भगदड़ पर उठाए सवाल; कांग्रेस ने की ये मांग

Congress Slams Modi Government: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ लेकर सवाल खड़ा किया है। और कहा कि कई लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर बेहद दुखद और परेशान करने वाली है। यह घटना एक बार फिर रेलवे की विफलता और सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करती है।

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राहुल गांधी ने रेलवे और सरकार पर उठाया सवाल।

Rahul Gandhi raised Questions on Stampede at New Delhi Railway Station: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात हुई भगदड़ की घटना पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी दुख जताया। इसके साथ ही उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

खड़गे ने मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा, 'नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ से कई लोगों की मृत्यु हो जाने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। स्टेशन से आ रहे वीडियो बेहद हृदयविदारक हैं। हमारी मांग है कि मृतकों व घायलों की संख्या जल्द से जल्द घोषित की जाए और गुमशुदा लोगों की पहचान भी सुनिश्चित की जाए। पीड़ितों के परिजनों को हमारी गहरी संवेदनाएं। घायलों को तत्काल इलाज हेतु स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए।'

हालांकि खड़गे के इस सवाल के बाद मृतकों के नाम और संख्या जारी किए जा चुके हैं।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने हादसे पर जताया शोक

वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी दुख जाहिर करते हुए लिखा, 'नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ की वजह से मची भगदड़ में महिलाओं और बच्चों समेत कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें। शोक-संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं।'

राहुल गांधी ने इसे रेलवे की नाकामी बताया

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने से कई लोगों की मृत्यु और कइयों के घायल होने की खबर अत्यंत दुखद और व्यथित करने वाली है। शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की आशा करता हूं। यह घटना एक बार फिर रेलवे की नाकामी और सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करती है। प्रयागराज जा रहे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए स्टेशन पर बेहतर इंतजाम किए जाने चाहिए थे। सरकार और प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि बदइंतजामी और लापरवाही के कारण किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े।'

मृतकों की सूची

क्रम संख्यानामपताउम्र
1आहा देवी, पत्नी रविन्दी नाथनिवासी- बक्सर, बिहार79 वर्ष
2पिंकी देवी, पत्नी उपेन्द्र शर्मानिवासी- संगम विहार, दिल्ली41 वर्ष
3शीला देवी, पत्नी उमेश गिरीनिवासी- सरिता विहार, दिल्ली50 वर्ष
4व्योम, पुत्र धर्मवीरनिवासी- बवाना, दिल्ली25 वर्ष
5पूनम देवी, पत्नी मेघनाथनिवासी- सारण, बिहार40 वर्ष
6ललिता देवी, पत्नी संतोषनिवासी- पटना, बिहार35 वर्ष
7सुरुचि, पुत्री मनोज शाहनिवासी- मुजफ्फरपुर, बिहार11 वर्ष
8कृष्णा देवी, पत्नी विजय शाहनिवासी- समस्तीपुर, बिहार40 वर्ष
9विजय साह, पुत्र राम सरूप साहनिवासी- समस्तीपुर, बिहार15 वर्ष
10नीरज, पुत्र इंद्रजीत पासवाननिवासी- वैशाली, बिहार12 साल
11शांति देवी, पत्नी राज कुमार मांझीनिवासी- नवादा, बिहार40 वर्ष
12पूजा, पुत्री राज कुमार मांझीनिवासी- नवादा, बिहार8 वर्ष
13संगीता मलिक, पत्नी मोहित मलिकनिवासी- भिवानी, हरियाणा34 वर्ष
14पूनम, पत्नी वीरेंद्र सिंहनिवासी- महावीर एन्क्लेव, दिल्ली34 वर्ष
15ममता झा, पत्नी विपिन झानिवासी- नांगलोई, दिल्ली40 वर्ष
16रिया सिंह, पुत्री ओपिल सिंहनिवासी- सागरपुर, दिल्ली7 वर्ष
17बेबी कुमारी, पुत्री प्रभु साहनिवासी- बिजवासन, दिल्ली24 वर्ष
18मनोज, पुत्र पंचदेव कुशवाहानिवासी- नांगलोई, दिल्ली47 वर्ष

बता दें कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 13 और 14 पर शनिवार देर रात उस समय भगदड़ मच गई जब कथित तौर पर यात्रियों के बीच प्रयागराज जा रही दो ट्रेनों के रद्द होने की अफवाह फैल गई। अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और बताया कि कई घायल बताए गए हैं जिनका इलाज किया जा रहा है। हादसे के बाद रेलवे ने चार विशेष ट्रेनों की व्यवस्था कर प्लेटफॉर्म पर भीड़ का दबाव कम किया। रेलवे ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं पुलिस भी इस भगदड़ की जांच में जुट गई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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