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कांग्रेस अध्यक्ष के नामांकन के लिए अब केवल 2 दिन, प्लान बी आएगा काम !

  • Agency by: Agency
  • Updated Sep 28, 2022, 06:54 PM IST

अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अगर अशोक गहलोत के अलावा दिग्विजय सिंह, के.सी.वेणुगोपाल जैसे गांधी परिवार करीबी नेताओं को मैदान में उतारा जाता है, तो उसका संदेश भी साफ है। इसके अलावा शशि थरूर भी नामांकन के लिए तैयार हैं। ऐसे में अगले 2 दिन आलाकमान के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • दिग्विजय सिंह गांधी परिवार के करीबी नेताओं में से एक हैं।
  • अशोक गहलोत प्रकरण से गांधी परिवार की साख को धक्का लगा है।
  • शशि थरूर की उम्मीदवारी करीब-करीब तय है।

Congress President Election: कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से पहले जिस तरह राजस्थान प्रकरण की वजह से गांधी परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी हुई हैं। उसके बाद जो समीकरण बनते दिख रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि अब पार्टी प्लान बी पर काम कर रही है। गांधी परिवार के बेहद करीबी दिग्विजय सिंह के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की चर्चा है। इसके अलावा अभी आलाकमान ने अशोक गहलोत को लेकर भी कोई स्थिति साफ नहीं की है। खबरों के अनुसार अशोक गहलोत जल्द ही सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। सवाल यही है कि जब नामांकन के लिए केवल दो दिन (30 सितंबर को है नमांकन का आखिरी दिन) बचे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पद का ड्रामा पार्टी को फायदा पहुंचाएगा या नुकसान।

शशि थरूर के बाद अब दिग्विजय भी लड़ेंगे चुनाव !

राजस्थान में हुए सियासी ड्रामे के बाद, अब आलाकमान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijya Singh) को अध्यक्ष पद की रेस में उतारने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार दिग्विजय सिंह आज रात दिल्ली लौटेंगे और 30 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) रेस से बाहर होते हैं, तो दिग्विजय सिंह गांधी परिवार के करीबी नेताओं में से एक हैं। और इस परिस्थिति में शशि थरूर (Shashi Tharoor) के मुकाबले दिग्वजिय सिंह को मैदान में उतारा जा सकते हैं। उनके पास न केवल प्रशासनिक स्तर पर लंबा-चौड़ा अनुभव है, बल्कि संगठन स्तर पर भी उनके पास अच्छा-खासा अनुभव है।

अशोक गहलोत चुनाव लड़ेंगे !

जिस तरह राजस्थान (Rajasthan) अशोक गहलोत के पक्ष में 92 विधायकों ने आलाकमान के हुक्म की परवाह नहीं की। उसके बावजूद गहलोत को कारण बताओ नोटिस न जारी करना, कांग्रेस के प्लान बी का हिस्सा लगता है। क्योंकि अगर पार्टी पहले ही अशोक गहलोत को रेस से बाहर कर देती है, तो संदेश गलत जा सकता है। ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ाया जा सकता है। और चुनाव में अगर गहलोत के अलावा दिग्विजय सिंह, के.सी.वेणुगोपाल जैसे गांधी परिवार करीबी नेताओं को मैदान में उतारा जाता है, तो उसका संदेश भी साफ है। ऐसे में सोनिया गांधी के साथ अशोक गहलोत की 28 सितंबर को रात की मुलाकात कई सियासी संदेश दे सकती हैं।

गहलोत के सत्ता प्रेम और आलाकमान के रैवये से बिगड़ा खेल

गांधी परिवार के पिछले चार दशक से करीबी रहे अशोक गहलोत ने ऐन वक्त झटका देकर, गांधी परिवार और टीम की सारी प्लानिंग को धता बता दिया है। आलाकमान भारत जोड़ो यात्रा और करीब 24 साल बाद अध्यक्ष पद का चुनाव कराने से जनता के बीच नया संदेश देना चाहता था। लेकिन गहलोत का सत्ता प्रेम इन सब पर भारी पड़ गया है। इसके अलावा जिस तरह राजस्थान की जमीनी हकीकत समझे बिना, सचिन पायलट को राजस्थान की सत्ता सौंपने की हड़बड़ी आलाकमान द्वारा दिखाई गई, उससे कांग्रेस की प्लानिंग पर पानी फिर गया।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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