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शशि थरूर ने की शुभांशु शुक्ला की सराहना, बोले- अंतरिक्ष मिशन पर गर्व

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) मिशन से शुभांशु शुक्ला के लौटने और वतन वापसी पर देशभर में खुशी है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संसद में विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी।

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शुभांशु शुक्ला के मिशन पर गर्व - कांग्रेस सांसद शशि थरूर

नई दिल्ली: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) मिशन से शुभांशु शुक्ला के लौटने और वतन वापसी पर देशभर में खुशी है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संसद में विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह जानकारी दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुभांशु के मिशन पर गर्व जताया है।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक किरेन रिजिजू ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "हमारे हीरो अंतरिक्ष यात्री कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के सफल मिशन के बाद स्वदेश लौट आए हैं। संसद उनके ऐतिहासिक पड़ाव और विकसित भारत की ओर हमारी यात्रा में भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं पर एक विशेष चर्चा के साथ उन्हें सम्मानित करेगी।" रिजिजू की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा कि भले ही विपक्ष इस विशेष चर्चा में शामिल नहीं हो रहा है, लेकिन वह शुभांशु शुक्ला के मिशन पर गर्व व्यक्त करना चाहते हैं।

शुभांशु के मिशन पर गर्व है- थरुर

उन्होंने लिखा कि कमांडर शुभांशु शुक्ला के हालिया अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) मिशन पर सभी भारतीयों को कितना गर्व है। यह हमारे देश के अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान, के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। शुक्ला के मिशन ने इसरो को अमूल्य व्यावहारिक अनुभव और डेटा प्रदान किया जिसे सिमुलेशन में दोहराया नहीं जा सकता। थरूर ने लिखा कि अंतरिक्ष मिशन के दौरान किए गए शुभांशु के प्रत्यक्ष अवलोकन गगनयान मिशन को जोखिम-मुक्त और परिष्कृत बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

भारतीय प्रणालियों और प्रोटोकॉल का परीक्षण संभव बनाया।

उन्होंने आगे कहा कि इस मिशन ने वास्तविक अंतरिक्ष में भारतीय प्रणालियों और प्रोटोकॉल का परीक्षण संभव बनाया। अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य और पौधों की वृद्धि पर अध्ययन सहित कई वैज्ञानिक प्रयोग, तकनीकी और वैज्ञानिक सत्यापन प्रदान करते हैं जो गगनयान के लिए जीवन-रक्षक और चिकित्सा प्रणालियों को डिजाइन करने में सीधे तौर पर मदद करेंगे। उन्होंने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ साझेदारी में संचालित शुक्ला के मिशन ने वैश्विक अंतरिक्ष कूटनीति में भारत की भूमिका को और मजबूत किया। यह बहुपक्षीय अंतरिक्ष प्रयासों में शामिल होने की भारत की इच्छा और क्षमता को दर्शाता है और भविष्य में संयुक्त अनुसंधान और निवेश के द्वार खोलता है।

शशि थरूर ने आगे लिखा, "कमांडर शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान मानव अंतरिक्ष उड़ान में भारत की महत्वाकांक्षाओं का एक सशक्त प्रतीक है। इसने देश की कल्पना को प्रभावित किया है और नई पीढ़ी को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित और अंतरिक्ष अध्ययन में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है - ये सभी भारत के दीर्घकालिक अंतरिक्ष लक्ष्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। शाबाश!" ( आईएएनएस )

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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