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वायनाड में अब कैसे हैं हालात? भूस्खलन ने मचाई तबाही; राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने लिया जायजा

Wayanad Landslide Update: राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा ने वायनाड का दौरा किया। उन्होंने भूस्खलन प्रभावित स्थान पहुंचकर हालात का जायजा लिया। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि वायनाड में फिलहाल कैसे हालात हैं, यहां कितने लोग मारे गए, कितने घायल हैं और कितने लापता है।

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वायनाड में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा।

Rahul Gandhi in Wayanad: वायनाड में अब कैसी स्थिति है? लोकसभा में विपक्ष के नेता, वायनाड से पूर्व सांसद राहुल गांधी और उनकी बहन, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बृहस्पतिवार को केरल में वायनाड जिले के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र चूरलमाला का दौरा किया। दोनों ही कांग्रेस नेताओं ने हालात का जायजा लिया।

राहुल और प्रियंका ने वायनाड का किया दौरा

कांग्रेस के मुताबिक बारिश के बीच घटनास्थल पर पहुंचने के बाद राहुल और उनकी बहन प्रियंका मेप्पाडी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि वहां से वे डॉ. मूपेन मेडिकल कॉलेज और मेप्पाडी स्थित दो राहत शिविरों के लिए रवाना होंगे। पार्टी महासचिव एवं अलप्पुझा से सांसद के सी वेणुगोपाल भी उनके साथ हैं।

वायनाड के पूर्व सांसद हैं राहुल गांधी

राहुल गांधी ने 2019 में वायनाड लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। हाल में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर वायनाड से जीत दर्ज करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट भी जीती। उन्होंने वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से जून में इस्तीफा दे दिया जहां उपचुनाव होने पर प्रियंका के चुनाव लड़ने की उम्मीद है। जिसका ऐलान खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और इस सीट से पूर्व सांसद राहुल गांधी ने किया था।

इससे पहले, राहुल और प्रियंका सुबह 9.30 बजे कन्नूर हवाई अड्डे पर उतरे और फिर सड़क मार्ग से वायनाड पहुंचे। वायनाड जिले में मंगलवार की सुबह मूसलाधार बारिश के कारण बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा बस्तियों को प्रभावित किया, जिसमें अब तक महिलाओं और बच्चों सहित 170 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अलग-अलग रिपोर्ट में अलग-अलग आंकड़े पेश किए जा रहे हैं।

वायनाड भूस्खलन में मौत और घायलों के आंकड़े

इस विनाशकारी आपदा में 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 25 बच्चे और 70 महिलाएं शामिल हैं। प्रशासन ने बताया कि शवों के अंगों सहित 252 शवों का पोस्टमार्टम पूरा हो चुका है और 100 शव की पहचान की जा चुकी है। जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक मलबे में से शवों के 92 अंग बरामद किए गए हैं। जिला प्रशासन ने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 234 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनमें से 92 का इलाज अब भी जारी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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