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लालू-तेजस्वी के राजद में मचा है घमासान,इस्तीफा-गुस्सा-गाली का चल रहा है खेला !

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 10, 2022, 07:35 PM IST

Lalu Prasad And Tejaswi Yadav: लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी जगदानंद सिंह का पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक मे नहीं आने से अटकलों का बाजार गरम है। ऐसी चर्चा है कि बेटे सुधाकर सिंह के नीतीश मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद, पिता जगदानंद की भी कुर्सी जा सकती है। असल में अपने बेटे सुधाकर सिंह के इस्तीफे से जगदानंद नाराज बताए जा रहे हैं।

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तेजस्वी और लालू प्रसाद यादव के लिए नई चुनौती

Photo : PTI
KEY HIGHLIGHTS
  • तेज प्रताप यादव ने श्याम रजक पर लगाया गंभीर आरोप।
  • बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह चल रहे हैं नाराज।
  • नीतीश सरकार से राजद कोटे के दो मंत्री दे चुके हैं इस्तीफा।

Lalu Prasad And Tejaswi Yadav: वैसे तो मौका, दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कार्यकारिणी की बैठक का था। और उसमें भाजपा को हराने के लिए पार्टी की भूमिका क्या रहेगी, इस पर चर्चा करना था। लेकिन लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की बैठक, दूसरी वजहों से सुर्खियों में छाई रही। एक तो लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने पार्टी के कई नेताओं पर गंभीर आरोप लगा दिए। दूसरे लालू के बेहद करीबी और पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह बैठक में ही नहीं पहुंचे। असल में जब से नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी यादव ने मिलकर सरकार बनाई, तभी से पार्टी में घमासान मचा हुआ है।

क्या जगदानंद सिंह को लगेगा झटका

पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो और वरिष्ठ नेता और राजद के लिए बेहद महत्वपूर्ण बिहार राज्य के प्रदेश अध्यक्ष ही पार्टी में नहीं पहुंचे तो वह आम बात नहीं है। लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी जगदानंद सिंह का बैठक मे नहीं आना, पूरे दिन छाया रहा। और अब अटकलों का बाजार गरम है। ऐसी चर्चा है कि बेटे सुधाकर सिंह के नीतीश मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद, पिता जगदानंद की भी कुर्सी जा सकती है। असल में अपने बेटे सुधाकर सिंह के इस्तीफे से जगदानंद नाराज बताए जा रहे हैं। इसीलिए बैठक में मौजूद रहने के बावजूद, सुधाकर सिंह ने पिता के बैठक से अनुपस्थित रहने से जुड़े सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।

वहीं इस मामले पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि जगदानंद सिंह के पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और रविवार को उनकी अनुपस्थिति वर्षों से उनकी निरंतर उपस्थिति के तथ्य को कमतर नहीं कर सकती। झा ने बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा,वह किसी कारण से नहीं आए होंगे। मैं आपको लिखकर दे सकता हूं कि वह हमारे साथ थे, हमारे साथ हैं और हमारे साथ रहेंगे।'

राजद के दो मंत्री दे चुके हैं इस्तीफा

असल में जगदानंद सिंह की नाराजगी को समझने के लिए पिछले दिनों के कुछ घटनाक्रमों को समझना बेहद जरूर है। बीते अगस्त में सरकार बनने के बाद , राजद नेता और जगदानंद सिंह उस समय सुर्खियों में आए, जब उन्होंने खुद को चोरों का सरदार कह दिया। सुधारकर सिंह के पास कृषि मंत्रालय का जिम्मा था। और बाद में तेजस्वी यादव के कहने पर उन्होंने नीतीश मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उसी के बाद से जदगानंद सिंह नाराज चल रहे हैं। और उन्होंने अपने बेटे के इस्तीफे को त्याग बताया था। उन्होंने कहा था कि सुधाकर सिंह ने किसानों की चिंताओं को अपनी आवाज दी थी, लेकिन कभी-कभी केवल प्रश्न उठाने से बात नहीं बनती, त्याग भी करना होता है।

सुधाकर सिंह के पहले कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था। उन पर भाजपा ने 2014 के अपहरण के एक मामले में नामजद होने का आरोप लगया था। जिसके बाद विवाद बढ़ने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा थाा।

तेज प्रताप ने लगा दिया गंभीर आरोप

अभी जगदानंद सिंह की गैर मौजूदगी का मामला थमा नहीं था कि बैठक के दौरान लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव ने पार्टी नेता श्याम रजक पर उनके कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया और बैठक छोड़कर चले गए। और आरोप लगाया कि श्‍याम रजक पराजद नेता श्याम रजक ने उन्‍हें गंदी-गंदी गालियां दी। साफ है कि राष्ट्रीय जनता दल सब-कुछ सामान्य नही है। और अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है। अब देखना है कि आने वाले समय में लालू यादव और तेजस्वी यादव पार्टी में कैसे बढ़ते कलह को रोकते हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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