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भारत की जासूसी के लिए म्यांमार को तैयार कर रहा चीन! अंडमान से 55 km दूर वह कोको द्वीप जहां तैयार हो रहा सैन्य बेस

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 1, 2023, 05:39 PM IST

Chinese Spy Base: म्यांमार के कोको द्वीप पर बने रनवे की लंगाई 2900 मीटर तक हो गई है, जबकि एक दशक पहले यह रनवे 1300 मीटर का था। इस सैन्य बेस के बीच चीनी साजिश का संदेह जताया जा रहा है।

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कोको द्वीप की उपग्रह तस्वीर (क्रेडिट- IADN)

Photo : Twitter

China wants to spy on India: भारत को घेरने के लिए चीन आए दिन कोई न कोई साजिश रच रहा है। फिर चाहें उसकी भारत के पड़ोसी देशों के साथ बढ़ती दोस्ती हो या फिर सैन्य गतिविधियां। उसकी हर चाल में साजिश की बू आती है। एक बार फिर चीन की ऐसी ही नापाक साजिश का खुलासा हुआ है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में पता चला है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से करीब 55 किलोमीटर दूर म्यांमार के कोको द्वीप पर सैन्य बेस का निर्माण जोरशोर से हो रहा है।

इन रिपोर्ट्स के सामने आते ही संदेह होने लगा है कि कहीं इस सैन्य बेस के पीछे चीन तो नहीं। दरअसल, कोको द्वीप को भारत हमेशा संदेह की दृष्टि से देखता है, क्योंकि चीन हमेशा म्यांमार के इस द्वीप का इस्तेमाल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को घेरने के लिए करता रहा है। म्यांमार के इस द्वीप पर सैन्य बेस के निर्माण की सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आई हैं।

भारत के लिए क्यों हो सकता है खतरा

मैक्सर टेक्नोलॉजीज द्वारा जारी की गई ताजा तस्वीरों में कोको द्वीप पर सैन्य गतिविधियां देखी गई हैं। यहां नए सिरे से निर्माण भी होता दिखा है। इसमें 2300 मीटर लंबा नया रनवे भी शामिल है। जबकि, एक दशक पहले इस रनवे की लंबाई 1300 मीटर थी। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि म्यांमार अपने गुप्त समुद्री निगरानी अभियानों के लिए द्वीपों को तैयार कर रहा है, जिसमें चीनी मिलीभगत का संदेह जताया जा रहा है। इसके अलावा यहां पर 200 इमारतों के निर्माण की भी खबरें हैं, जिन्हें म्यांमार के सैन्य कर्मियों के उपयोग में लाने जाने की बात कही जा रही है।

म्यांमार की चीन पर बढ़ रही निर्भरता

चीन के साथ म्यांमार की नजदीकी भारत के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। दरअसल, म्यांमार इन दिनों विद्रोह का दंश झेल रहा है। इस विद्रोह को दबाने के लिए वह चीन की मदद से रहा है और धीरे-धीरे उस पर निर्भर होता जा रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे म्यांमार को चीन से मदद मिल रही है और इसके बदले वह म्यांमार को भारत के खिलाफ जासूसी के लिए तैयार कर रहा है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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