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चंद्रयान-3 ऐसे पूरा करेगा 4 लाख किलोमीटर का सफर, पृथ्वी से होगा दूर और पहुंचेगा चांद के करीब

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Jul 14, 2023, 03:14 PM IST

Chandrayan 3 Mission : चंद्रयान 3 चंद्रमा के सबसे अबूझ एवं अंधकारमय हिस्से पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चांद का यह हिस्सा अभी तक वैज्ञानिक परीक्षणों से दूर रहा है। इसके बारे में बहुत जानकारी नहीं है। ऐसे में चंद्रयान-3 की इस सतह का परीक्षण एवं जांच काफी अहम होगा। चंद्रयान-3 के तीन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

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चंद्रमा की सतह पर करेगा सॉफ्ट लैंडिंग। तस्वीर-@isro

Chandrayan 3 Mission : भारत का चंद्रयान-3 बड़े लक्ष्यों को लेकर चंद्रमा की तरफ रवाना हो गया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उसकी सफल लॉन्चिंग हुई। पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने में उसे करीब 48 दिन लगेंगे। चंद्रयान की यह यात्रा लंबी लेकिन महत्वपूर्ण है। इसकी सफलता इसरो के भविष्य की तैयारियों एवं मिशन का एक बड़ा आधार बनेगी। भारत के इस मिशन पर दुनिया की नजरें लगी हैं। चंद्रमा के साउथ पोल पर इसे लैंड कराने की तैयारी इस मिशन को और खास बना रही है। अमेरिका, रूस और चीन के अंतरिक्ष यान चंद्रमा के नॉर्थ पोल पर उतरे हैं।

चांद की सतह तक ऐसे पहुंचेगा चंद्रयान 3

श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM-3) रॉकेट से चंद्रयान-3 को प्रक्षेपित किया जाएगा। 640 टन वजनी यह रॉकेट चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। इसके बाद चंद्रयान-3 पृथ्वी का चक्कर लगाएगा और फिर धीरे-धीरे अपने प्रोपल्शन का इस्तेमाल कर अपना दायरा बढ़ाता रहेगा। इस तरह वह पृथ्वी से दूर और चंद्रमा के करीब पहुंचने का उसका क्रम जारी रहेगा। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में पहुंचने के बाद प्रोपल्शन की मदद से ये धीरे-धीरे उसकी सतह की और बढ़ना शुरू करेगा और फिर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।

चंद्रमा की सतह पर क्या करेगा चंद्रयान-3

चंद्रयान 3 चंद्रमा के सबसे अबूझ एवं अंधकारमय हिस्से पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चांद का यह हिस्सा अभी तक वैज्ञानिक परीक्षणों से दूर रहा है। इसके बारे में बहुत जानकारी नहीं है। ऐसे में चंद्रयान-3 की इस सतह का परीक्षण एवं जांच काफी अहम होगा। चंद्रयान-3 के तीन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। पहला लक्ष्य चांद की सतह पर लैंडर की सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग कराना है। इसरो का दूसरा लक्ष्य रोवर प्रज्ञान को चांद की सतह पर चलाकर दिखाना है और तीसरा लक्ष्य सतह पर मौजूद रासायनिक तत्वों एवं मिट्टी की जांच कर डाटा वापस इसरो केंद्र पर भेजना है। चंद्रयान-3 चंद्रमा पर रासायनिक तत्वों एवं मिट्टी की बनावट की जांच करते हुए जल की संभावनाओं को भी टटोलेगा। धरती से चांद की दूरी करीब 4 लाख किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में चंद्रयान-3 को करीब 40 से 48 दिनों का समय लगेगा।

चंद्रयान के तीन हिस्से-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर

चंद्रयान-3 के तीन हिस्से हैं। पहला ऑर्बिटर है जो चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग से पहले चंद्रमा का चक्कर लगाएगा। इसका दूसरा हिस्सा लैंडर विक्रम है जो सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा और तीसरा हिस्सा रोवर प्रज्ञान है जो सॉफ्ट लैंडिंग के बाद सतह की जांच करेगा। पिछली बार चंद्रयान 2 की सॉफ्ट लैंडिंग करते समय उसका इसरो से कम्यूनिकेशन टूट गया और उसकी क्रैश लैंडिंग हुई। इसरो ने अपनी पिछली गलतियों को सुधारते हुए इस बार पूरी पुख्ता तैयारी के साथ चंद्रयान-3 की तैयारी की है।

साउथ पोल के रहस्यों से उठेगा परदा

बता दें कि चांद का एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है। इन 14 दिनों में रोवर चंद्रमा की सतह का चक्कर लगाते हुए वैज्ञानिक परीक्षण करेगा। रोवर में लगे कैमरे चांद की सतह की तस्वीरें और डाटा भेजेंगे। भेजे जाने वाले डाटा चंद्रमा के बारे में नई चीजों एवं रहस्यों से परदा उठ सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चांद की सतह के नीचे कई बहुमूल्य सोना, प्लेटिनम और यूरेनियम जैसी धातुएं हो सकती हैं।

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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