देश

अब नहीं चलेगी फार्मा कंपनियों की चालाकी, डॉक्टरों की फ्री यात्रा होगी बंद, गिफ्ट्स पर लगेगा रोक! सरकार की क्या है तैयारी?

Rules for Pharma Companies and Doctors: केंद्र सरकार ने बताया है कि वह डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट और विदेशी यात्राओं जैसी सुविधाएं देकर अपनी दवाओं की बिक्री से कंपनियों को रोकने के लिए नियम बनाने पर विचार कर रही है।

Image

अब नहीं चलेगी फार्मा कंपनियों की चालाकी, डॉक्टरों की फ्री यात्रा होगी बंद, गिफ्ट्स पर लगेगा रोक! सरकार की क्या है तैयारी?

Freebies to Doctors: आपने अक्सर देखा होगा कि जब आप डॉक्टर के पास दिखाने जाते हैं तो वह किसी स्पेशल कंपनी की ही दवाई लिखता है। ये भी देखा होगा कि जो दवाई आपको डॉक्टर ने लिखकर दी है, वह सिर्फ वहीं, उसी के अस्पताल में ही मिलती है। इतना आप भी जानते हैं कि इसमें डॉक्टरों का कमीशन होता है। जितनी ज्यादा खास कंपनियों की दवाई बेची जाएंगी, उतना डॉक्टरों का फायदा। डॉक्टर अपने पेशे से जितना कमाते हैं, उसके अलावा ये फार्मा कंपनियों के दिए गए लालच को भी स्वीकार करते हुए उनकी दवाइयों को ज्यादा लिखते हैं। अब जहां इसपर नकेल कंसने की तैयारी सरकार कर रही है।

होता क्या है कि डॉक्टरों के पास दवाई कंपनियों के MR बैठे रहते हैं और वे उनकी कंपनी की दवा ज्यादा लिखने पर डॉक्टर को ऑफर देते हैं। उनमें महंगे-महंगे गिफ्ट्स के अलावा फ्री ट्रिप्स भी दी जाती हैं। ऐसे में वे इस तरीके से अपनी कंपनी की दवाइयों को मार्केट में ज्यादा बेच पाते हैं।

केंद्र ने क्या लिया फैसला?

केंद्र सरकार ने (21 अप्रैल, 2026) सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट और विदेशी यात्राओं जैसी सुविधाएं देकर अपनी दवाओं की बिक्री से कंपनियों को रोकने के लिए नियम बनाने पर विचार कर रही है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि इसमें अभी उसे दो महीने का समय लग सकता है। जहां सरकार के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई तक टाल दी गई।

कौनसे मामले की सुनवाई?

दरअसल, फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMRAI) नाम की संस्था ने 2021 में एक केस फाइल किया, जिसपर 5 सालों से सुनवाई चल रही है। कोर्ट में याचिका लगाते हुए दवाओं की मार्केटिंग से जुड़े नियमों को कानूनी रूप बाध्यकारी बनाने की मांग की गई थी। जहां 1 मई, 2025 को मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की थी कि डॉक्टरों से अपने पर्चे पर सिर्फ जेनेरिक दवा लिखनी चाहिए।

आपको याद हो कि कोविड के समय डोलो 650 पर खूब सवाल उठे थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे मार्केट में इसके अलावा और कोई दवाई है ही नहीं। हर कहीं डोलो को ही खाने की बात कह रहा था। FMRAI ने इसके पीछे कई तरह की साजिशों का अंदाजा लगाते हुए केस फाइल किया था। यहां मामला सारा डॉक्टरों को लालच देकर काम कराने का है। जिसपर सख्ती की जरूरत है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article