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येदियुरप्पा के 'भूत' से बढ़ेगी बेटे की टेंशन? एक-दो नहीं, 4 बार छोड़नी पड़ी CM की कुर्सी; जानें इतिहास

Karnataka Politics: कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को बुरी तरह पटखनी दी। जबसे बीएस येदियुरप्पा ने सीएम पद छोड़ा था, तबसे ऐसा दावा किया जा रहा था कि उनकी राजनीति खत्म हो गई, उनकी जगह बसवराज बोम्मई को सीएम बनाया गया था, उन्ही के चेहरे पर चुनाव हुआ था। अब भाजपा ने येदियुरप्पा के बेटे को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। समझिए समीकरण...

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क्या बीएस येदियुरप्पा को सता रही है बेटे की चिंता?

Vijayendra Yediyurappa News: दो साल से ये खूब चर्चा हुई कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा की सियासी जीवन पर ग्रहण लग चुका है। अब ऐसा सिद्ध होता दिख रहा है, क्योंकि भाजपा ने उनके बेटे विजयेंद्र येदियुरप्पा को भाजपा की राज्य इकाई का प्रमुख नियुक्त किया है। मतलब ये कि अब कर्नाटक में भाजपा की कमार जूनियर येदियुरप्पा के हाथों में है। अगर इतिहास का जिक्र करें तो विजयेंद्र के पिता येदियुरप्पा का भूत (बीता हुआ कल) से उनकी टेंशन जरूर बढ़ सकती है। आखिर क्या है वो इतिहास नीचे पढ़िए...।

येदियुरप्पा और कुर्सी से इस्तीफे की कहानी

28 जुलाई, 2021 इस तारीख को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा शायद कभी नहीं भूल पाएंगे। ये वही दिन था जब येदियुरप्पा को चौथी बार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कांग्रेस-जेडीएस की गठजोड़ वाली सरकार को गिराने के बाद 26 जुलाई 2019 को उन्होंने चौथी बार सीएम की कुर्सी संभाली थी। जैसा कि उनका इतिहास रहा, वो चार बार मुख्यमंत्री बने और हर बार किसी न किसी वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उनके सियासत का यही इतिहास उनके बेटे की परेशानी बढ़ाता रहा है, कहीं पिता का भूत बेटे के भविष्य की टेंशन न बन जाए।

  1. वर्ष 2007 में बीएस येदियुरप्पा पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उस वक्त वो सिर्फ एक हफ्ते (12 नवंबर 2007 से 19 नवंबर 2007 तक) ही कुर्सी पर रह सके थे।
  2. 30 मई 2008 को बीएस येदियुरप्पा दूसरी बार कर्नाटक के सीएम बने और भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें 4 अगस्त 2011 को फिर से इस्तीफा देना पड़ा था।
  3. विधानसभा चुनाव 2018 के बाद 17 मई 2018 को फिर सीएम पद की शपथ ली। बहुमत नहीं साबित कर पाने के चलते 23 मई 2018 को इस्तीफा देना पड़ा।
  4. कांग्रेस और जेडीएस के 13 विधायकों के साथ आने से वो 26 जुलाई 2019 को चौथी बार सीएम बने, मगर इस बार पार्टी ने उन्हें 28 जुलाई 2021 को पद से हटा दिया।

कर्नाटक में क्यों होता रहा येदियुरप्पा का विरोध?

बीएस येदियुरप्पा को जब 2019 में मुख्यमंत्री बनाया गया, तभी से उनका विरोध हुआ। वो लिंगायत समुदाय से आते हैं, इसके बावजूद कुछ सीनियर नेताओं ने उस वक्त येदियुरप्पा का विरोध किया और ये आरोप लगा कि वो पुराने लोगों की अनदेखी करते हैं और नए लोगों को ज्यादा तरजीह देते हैं। करीब एक साल तक पार्टी हाईकमान पर दबाव बनाया गया, शिकायतें हुईं... ऐसे में येदियुरप्पा की मुश्किलें बढ़ गईं। अब डर इस बात का है कि जैसे उनका विरोध हुआ, वैसे ही उनके बेटे विजयेंद्र भी सीनियर नेताओं की आंखों में चुभने लगेंगे तो मुश्किल होगी।

जद(एस) के नेताओं ने विजयेंद्र येदियुरप्पा को दी बधाई

भाजपा के नए गठबंधन सहयोगी जनता दल (सेक्यूलर) के नेताओं ने शुक्रवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र येदियुरप्पा को भाजपा की राज्य इकाई का प्रमुख नियुक्त किये जाने पर बधाई दी। जद (एस) कार्यालय के एक बयान के अनुसार, जद (एस) के संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा तथा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एच. डी. कुमारस्वामी ने विजयेंद्र को फोन पर बधाई दी। कुमारस्वामी ने बाद में सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'पहले से ही भाजपा में एक युवा नेता के रूप में सक्रिय विजयेंद्र को कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। मुझे विश्वास है कि वह उन्हें सौंपी गई इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालने में सक्षम होंगे। मैं, श्री विजयेंद्र को शुभकामनाएं देता हूं।'

कांग्रेस ने 'वंशवाद की राजनीति' पर किया कटाक्ष

भाजपा पर 'वंशवाद की राजनीति' का आरोप लगाते हुए कर्नाटक में कांग्रेस इकाई ने 'एक्स' पर कटाक्ष किया, 'येदियुरप्पा के बेटे को बधाई, जो येदियुरप्पा के बेटे होने की योग्यता के आधार पर भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चुने गए हैं।' भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी विजयेंद्र को फोन पर बधाई दी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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