Bomb Threat In India: पिछले दो महीनों में प्रॉक्सी डोमेन सर्वर और VPN का उपयोग करके ईमेल के ज़रिए बम धमकियाँ भेजे जाने की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें 200 से ज़्यादा ऐसे धमकी भरे ईमेल मिले हैं, जो पुलिस विभाग, होटल, अस्पताल, कॉलेज, हवाई अड्डे और स्कूलों सहित कई तरह के संस्थानों को प्रभावित कर रहे हैं।
दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों को खास तौर पर निशाना बनाया गया है, जो इन धमकियों की व्यापक प्रकृति को दर्शाता है।
इसकी शुरुआत कैसे हुई (How It Started)?
इस साल 1 मई को सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के 120 से ज़्यादा स्कूलों को बम धमकियां भेजी गईं। उल्लेखनीय रूप से, प्रेषकों ने एक रूसी डोमेन सेवा प्रदाता, @mail.ru का उपयोग किया तथा ईमेल में जिहाद का अप्रत्यक्ष संदर्भ था।
बाद में, 12 मई को, अज्ञात प्रेषकों ने एक अलग डोमेन आईडी, @beeble.com का उपयोग करके, दिल्ली, उत्तरी रेलवे और दिल्ली हवाई अड्डे के 15 अस्पतालों को बम की धमकी वाले ईमेल भेजे। इसी तरह, पिछले साल दिसंबर में, बेंगलुरु के 70 स्कूलों को उसी डोमेन सेवा प्रदाता से ईमेल प्राप्त हुए।
घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने बैठक बुलाई
इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एक बैठक बुलाई, जिसमें दिल्ली पुलिस आयुक्त से स्कूलों को निर्देशित बम की धमकी वाले ईमेल से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया स्थापित करने का आग्रह किया गया।
दिल्ली के 15 कॉलेजों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले
23 मई को बेंगलुरु के तीन होटलों और दिल्ली के 15 कॉलेजों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले जिन्हें बाद में गहन जांच के बाद फर्जी पाया गया। मई के अंतिम सप्ताह में नॉर्थ ब्लॉक को दिल्ली पुलिस को भेजा गया एक बम की धमकी वाला ईमेल मिला। इसके बाद, 17 जून को, मुंबई के 50 से अधिक प्रमुख अस्पतालों को वीपीएन नेटवर्क के माध्यम से भेजे गए ईमेल के माध्यम से बम की धमकी मिली। अगले दिन, 18 जून को, बम की धमकी वाले ईमेल 40 हवाई अड्डों को निशाना बनाकर भेजे गए।
जांच कैसे शुरू की गई (How Was The Probe Initiated)?
1 मई को 100 स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की पर आरोपियों की पहचान करने में कोई सफलता नहीं मिली है गौर हो कि ईमेल की सामग्री प्रत्येक घटना के साथ बदलती रही। भेजने वालों ने अपनी पहचान और ईमेल की उत्पत्ति को छिपाने के लिए उपाय किए हैं। सूत्रों से पता चलता है कि इन घटनाओं के पीछे महज शरारत से कहीं अधिक गहरी मंशा हो सकती है।
