FCRA Amendment Bill: विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर विचार के लिए गुरुवार को 31-सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता भाजपा के लोकसभा सदस्य संजय जायसवाल करेंगे। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल किए गए हैं।
संयुक्त समिति में किस-किस को मिली जगह
इस समिति में लोकसभा से भाजपा के डॉ. संजय जायसवाल के अलावा भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेश कुमार चंद्रकांत दलाल, निशिकांत दुबे और विष्णु दयाल राम, कांग्रेस के एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मोहम्मद हमदुल्लाह सईद, समाजवादी पार्टी के जियाउर रहमान, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, द्रमुक के ए. राजा, तेलुगुदेशम पार्टी लावू श्री कृष्ण देवरायलु, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की सुप्रिया सुले, आईयूएमएल के ई. टी. मोहम्मद बशीर तथा कुछ अन्य सदस्य शामिल हैं।
राज्यसभा से भाजपा सदस्य उज्ज्वल निकम, डॉ. अलका गुर्जर, हर्षवर्धन शृंगला, सतपाल शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल, जनता दल (यू) के संजय कुमार झा, कांग्रेस के क्रिस्टोफर तिलक, द्रमुक के पी विल्सन और कुछ अन्य सदस्य समिति में शामिल किए गए हैं।
कई विपक्षी दलों की आलोचना और विभिन्न परमार्थ संगठनों की मांग के बाद बीते 12 अगस्त को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (FCRA) विधेयक, 2026 को विस्तृत समीक्षा और संभावित सुझावों के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया था। लोकसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया था कि समिति वर्ष 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक लोकसभा को रिपोर्ट सौंपेगी।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: कर्नाटक में पार्क की जमीन का नहीं होगा सार्वजनिक इस्तेमाल, शिवकुमार सरकार वापस लेगी विवादित विधेयक
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 16,000 संगठन अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं और उन्हें सालाना लगभग 22,000 करोड़ रुपये मिलते हैं। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में पूर्व अनुमति के तहत प्राप्ति और उपयोग के लिए समयसीमा प्रदान करने का प्रावधान किया गया।
