Jupiter Ashlesha Nakshatra Transit 2026: देवगुरु बृहस्पति 3 सितंबर 2026 की शाम 7 बजकर 2 मिनट पर अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे पद में प्रवेश कर चुके हैं। बृहस्पति इस समय कर्क राशि में अपनी उच्च राशि में स्थित हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार गुरु ने 19 अगस्त को अश्लेषा के पहले पद में प्रवेश किया था और 3 सितंबर को शाम 7:02 बजे दूसरे पद में पहुंचे। ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, संतान, विवाह, धन, शिक्षा, भाग्य, गुरु, विस्तार और समृद्धि का कारक माना जाता है।
कर्क राशि में गुरु की स्थिति विशेष मजबूत मानी जाती है। अब गुरु अश्लेषा नक्षत्र में हैं, जिसके स्वामी बुध हैं। ऐसे में गुरु के ज्ञान और विस्तार का संबंध बुध की बुद्धि, कम्युनिकेशन, व्यापार, गणना और रणनीति से जुड़ता है। गुरु इस दौरान कर्क से अपनी पांचवीं दृष्टि वृश्चिक, सातवीं दृष्टि मकर और नौवीं दृष्टि मीन पर डाल रहे हैं। यही दृष्टियां कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण लाभ के रास्ते खोलती हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि 3 सितंबर को गुरु के अश्लेषा के दूसरे पद में पहुंचने के समय वह कर्क राशि में ही बने हुए हैं और उनकी स्थिति मजबूत है।
ऐसे में यह नक्षत्र परिवर्तन सिर्फ सामान्य बदलाव नहीं है। करियर, धन, शिक्षा, विवाह और नई योजनाओं से जुड़े मामलों में इसकी खास भूमिका रहेगी। चंद्र राशि के आधार पर देखें तो कुछ राशि वालों के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन ज्यादा शुभ परिणाम देने वाला है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए कर्क राशि दूसरा भाव है। यह धन, बचत, परिवार और वाणी का भाव माना जाता है। ऐसे में उच्च राशि के गुरु का यहां प्रभाव आर्थिक मामलों के लिए काफी मजबूत स्थिति बनाता है। नौकरी करने वालों की कमाई बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। वेतन वृद्धि, इनकम के नए सोर्स या पहले से चल रहे किसी काम से आर्थिक फायदा मिलने के संकेत मजबूत होते हैं।
बिजनेस करने वालों के लिए ग्राहक, पेमेंट और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों में गति आएगी। अश्लेषा का स्वामी बुध है और बुध व्यापार तथा कम्युनिकेशन का कारक है। इसलिए बातचीत, डील, नेगोशिएशन और कम्युनिकेशन स्किल के जरिए पैसा कमाने वालों को खास फायदा मिलेगा। मिथुन राशि वालों के लिए गुरु का यह चरण धन बढ़ाने, बचत मजबूत करने और प्रोफेशनल कम्युनिकेशन को कमाई में बदलने वाला है।
कर्क राशि
कर्क राशि में ही गुरु विराजमान हैं, इसलिए इस राशि पर इस परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ेगा। प्रथम भाव से गुरु का गोचर व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, सोच और जीवन की दिशा को मजबूत करता है। कई मामलों में अटकी हुई योजनाएं आगे बढ़ेंगी। नौकरी में सीनियर लोगों का सहयोग मिलेगा और बिजनेस करने वालों के लिए नए संपर्क उपयोगी साबित होंगे।
शिक्षा, परिवार और निजी जीवन से जुड़े मामलों में भी गुरु सकारात्मक दिशा देंगे। सबसे अहम बात यह है कि गुरु की पांचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि क्रमशः वृश्चिक, मकर और मीन पर पड़ रही है। इससे कर्क राशि के लोगों के लिए भी ज्ञान, संबंध और भविष्य की योजनाओं से जुड़े फैसलों में स्पष्टता बढ़ेगी। अश्लेषा का प्रभाव व्यक्ति को सतही सोच के बजाय किसी विषय की गहराई में जाने की प्रेरणा देता है। कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर नई दिशा तय करने और अपने अनुभव को उपलब्धि में बदलने वाला रहेगा।
कन्या राशि
कन्या राशि से कर्क ग्यारहवां भाव है। ग्यारहवां भाव आय, लाभ, बड़े संपर्क, नेटवर्क और इच्छापूर्ति का होता है। उच्च राशि के गुरु का यहां पहुंचना कन्या राशि वालों के लिए बेहद शुभ स्थिति बनाता है। नौकरी में इंक्रीमेंट, प्रमोशन या अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ कमाई बढ़ने की स्थिति बन सकती है। बिजनेस में पुराने क्लाइंट से दोबारा काम मिल सकता है।
बड़े लोगों से संपर्क बढ़ेंगे और वही संपर्क भविष्य में फायदा दिलाएंगे। अश्लेषा नक्षत्र बुध के अधीन है और बुध कन्या राशि के स्वामी भी हैं। इसलिए यह गोचर कन्या राशि के लिए और खास हो जाता है। लेखन, डिजिटल, अकाउंटिंग, ट्रेडिंग, कम्युनिकेशन, रिसर्च और एनालिसिस से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा। कन्या राशि वालों के लिए गुरु का यह परिवर्तन आय बढ़ाने और सही लोगों से जुड़कर करियर को आगे ले जाने वाला है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के लिए कर्क नौवां भाव है। नौवां भाव भाग्य, धर्म, गुरु, उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा और बड़े अवसरों का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु स्वयं नौवें भाव के कारक ग्रह हैं और यहां से वृश्चिक पर अपनी पांचवीं दृष्टि भी डाल रहे हैं। उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छे परिणाम का समय है। विदेश जाने या दूसरे शहर में पढ़ाई या नौकरी से जुड़ी योजना आगे बढ़ेगी।
करियर में कोई सीनियर, गुरु या अनुभवी व्यक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पिता या वरिष्ठ व्यक्ति से सहयोग मिलेगा। लंबे समय से रुके किसी काम में रास्ता खुलेगा। वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में यह चरण भाग्य मजबूत करने, शिक्षा में आगे बढ़ने और करियर की बड़ी दिशा तय करने वाला है।
मकर राशि
मकर राशि से कर्क सातवां भाव है। सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी, बिजनेस पार्टनर और पब्लिक डीलिंग का होता है। ऐसे में गुरु का मजबूत गोचर संबंधों के मामलों में सकारात्मक प्रभाव देता है। विवाह योग्य लोगों के लिए रिश्ते की बातचीत आगे बढ़ेगी। विवाहित लोगों के बीच समझ बेहतर होगी और जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा।
बिजनेस करने वालों के लिए नया पार्टनर या किसी पुराने पार्टनर के साथ बड़ा काम करने का अवसर बन सकता है। गुरु की सातवीं स्थिति सीधे संबंधों को मजबूत करती है, जबकि अश्लेषा का बुध से संबंध समझदारी और बातचीत की भूमिका बढ़ाता है। मकर राशि वालों के लिए यह गोचर शादी, पार्टनरशिप और प्रोफेशनल डील के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।
मीन राशि
मीन राशि वालों के लिए कर्क पांचवां भाव है। पंचम भाव शिक्षा, बुद्धि, संतान, प्रेम, क्रिएटिविटी और भविष्य की योजनाओं का माना जाता है। गुरु स्वयं पंचम भाव के प्राकृतिक कारक हैं, इसलिए यहां उनका प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में फायदा मिलेगा। प्रतियोगी परीक्षा और उच्च शिक्षा की तैयारी करने वालों का फोकस मजबूत रहेगा।
क्रिएटिव फील्ड, कंटेंट, लेखन, मीडिया और शिक्षा से जुड़े लोगों को नए अवसर मिलेंगे। संतान से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। प्रेम संबंधों में भी समझ और स्थिरता बढ़ेगी। गुरु की नौवीं दृष्टि मीन राशि पर भी पड़ रही है, इसलिए यह गोचर इस राशि के लिए और ज्यादा प्रभावशाली बन रहा है। मीन राशि वालों के लिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में जाना शिक्षा, बुद्धि, संतान और क्रिएटिव करियर के लिए शानदार समय लेकर आया है।
अश्लेषा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश क्यों है खास
अश्लेषा 27 नक्षत्रों में नौवां नक्षत्र है और इसका स्वामी बुध है। ज्योतिष में अश्लेषा को गहराई, रणनीति, रहस्य और किसी विषय की तह तक पहुंचने वाली ऊर्जा से जोड़ा जाता है। दूसरी तरफ गुरु ज्ञान, समझ और विस्तार के ग्रह हैं। गुरु जब बुध के नक्षत्र में आते हैं तो ज्ञान को कम्युनिकेशन, रिसर्च, व्यापार और रणनीति के साथ जोड़ने का प्रभाव बढ़ता है। यही कारण है कि शिक्षा, मीडिया, लेखन, रिसर्च, डिजिटल काम, बिजनेस और एनालिसिस से जुड़े लोगों के लिए यह बदलाव खास महत्व रखता है।
खासतौर पर मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन राशि वालों के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन ज्यादा शुभ दिखाई देता है। मिथुन को धन, कर्क को आत्मविश्वास और नई दिशा, कन्या को आय, वृश्चिक को भाग्य, मकर को विवाह और साझेदारी तथा मीन को शिक्षा और क्रिएटिविटी में फायदा मिलेगा।
गुरु कर्क राशि में अपनी मजबूत स्थिति में हैं और अश्लेषा के दूसरे पद में प्रवेश के बाद उनका प्रभाव बुध के क्षेत्रों बुद्धि, कम्युनिकेशन, व्यापार और रणनीति से और मजबूती से जुड़ रहा है। ऐसे में सितंबर 2026 से आगे की अवधि इन छह राशियों के लिए सोच को परिणाम में बदलने और सही अवसर को पकड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाली है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और ज्योतिष विद्या के अच्छे जानकार लेखक द्वारा विश्लेषण करके दी गई है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। आपके ऊपर इसका प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और महादशाओं पर भी निर्भर करेगा। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
