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बिहार में दो बड़े घटनाक्रम: शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा RJD में शामिल, क्रिकेटर ईशान किशन के पिता थामेंगे 'नीतीश' का हाथ

Bihar News: आरजेडी के वरिष्ठ नेता रहे मोहम्ममद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा आज(रविवार) राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गएृ। इसके अलावा क्रिकेट ईशन किशन के पिता पणव पांडे भी सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह जेडीयू में शामिल होंगे।

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ओसामा व प्रणव पांडे।

Photo : Twitter

Bihar News: सियासत की पाठशाला कहे जाने वाले बिहार से दो बड़े घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, दिवंगत सांसद और आरजेडी के वरिष्ठ नेता रहे मोहम्ममद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा आज(रविवार) राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव व तेजस्वी यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। ओसामा के अलावा उनकी मां हिना शहाब भी आज आरजेडी में शामिल हो गईं।

लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि पार्टी में उनका स्वागत और ओसामा के पार्टी में शामिल होने से कार्यकर्ता एकजुट और मजबूत होंगे। ओसामा ने शनिवार को लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की थी। इसके अलावा क्रिकेट ईशान किशन के पिता प्रणव पांडे भी सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह जेडीयू में शामिल होंगे।

बिहार में चुनाव से पहले बड़ा खेल

बिहार के इन दो राजनीतिक घटनाक्रमों से सियासी हलचल मच गई है। दरअसल, बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में ओसामा का आरजेडी में शामिल होना एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि शहाबुद्दीन राजद के प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं। उनकी पत्नी हिना साहेबी भी आरजेडी से जुड़ी रही हैं। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बगावत कर दी थी। अब दोनों फिर से राजद में शामिल हो गए। उधर, जदयू ने भी ईशान किशन के पिता को पार्टी में शामिल कराकर बड़ा दांव चला है। पार्टी का मानना है कि इससे युवाओं में अच्छा संदेश जाएगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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