Mawa-Paneer Adulteration: त्योहारी सीजन में मिलावट, जमाखोरी और खाद्य मानकों के उल्लंघन के खिलाफ देशभर में अभियान तेज हो जाते हैं और अक्सर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार सहित तमाम राज्यों से मिलावटी खाद्य सामान बरामद होता है, जिन्हें तत्काल नष्ट तक कर दिया जाता है। मौजूदा समय में मिलावटी मावा, सिंथेटिक पनीर इत्यादि जैसी सैकड़ों टन डेयरी प्रोडक्ट को नष्ट किया गया है। इसके बावजूद लगातार मिलावटखोर अपनी इन हरकतों से बाज नहीं आते हैं और समय-समय पर आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि यह महज किसी एक राज्य की दास्तां हो। अमूमन चारों तरफ ऐसी ही रिपोर्ट्स छाई हुई हैं।
नहीं हो पाती मिलावटखोर की पकड़?
लेकिन यह कहना कि कार्रवाई हर मिलावटखोर के खिलाफ हो रही है या मिलावटी सामान के खिलाफ तो ये ठीक नहीं होगा। आपके आसपास कई ऐसी दुकानें भी होंगी, जो एकदम शुद्ध और स्वच्छ सामग्रियों का व्यापार करती होंगी, परंतु हर कोई ऐसा ही हो... यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि ऐसे लोगों को कानून का डर भी नहीं सताता है तभी तो धड़ल्ले से त्योहारी सीजन में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं तो चलिए विस्तार से समझते हैं इसके बारे में...
बेखौफ मिलावटखोर
खाद्य सुरक्षा विभाग की सतर्कता के बावजूद मिलावटखोर बेखौफ धड़ल्ले से खाद्य सामग्रियों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। त्योहार आते ही मावा, पनीर, मिठाई, तेल और मसालों में मिलावट का कारोबार बढ़ जाता है। खाद्य विभाग द्वारा लगातार छापेमारी के बावजूद मिलावटखोरों के खिलाफ युद्ध अकेले नहीं जीता जा सकता है। ऐसे में आप लोगों को अपनी सेहत का खुद भी ध्यान रखना होगा। आप को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आप जो भी सामग्री इस्तेमाल कर रहे हैं- वो क्या शुद्ध और स्वच्छ है या फिर उसमें मिलावट की गई है। हम आपको आगे कुछ टिप्स भी बताएंगे, जो आपको मिलावटी सामानों से बचाव में कारगर साबित हो सकते हैं।
मिलावटखोरों से रहें सावधान
मिलावटखोर डिटर्जेंट, यूरिया और पाम ऑयल का इस्तेमाल कर मिलावटी मावा और पनीर तक तैयार कर रहे हैं, जो महज 90 से 150 रुपये में बनकर तैयार हो जाता है और उसे बाजार में 400-500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। इस लंबे-चौड़े मुनाफे के सामने पकड़े जाने पर मिलावटखोर जुर्माने का डर नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कानून का डर तो उन्हें तब भी होता है।
Fake Paneer
हालांकि, मिलावटखोरी के पीछे सिर्फ कानून की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्थागत खामियां और बहुत ज्यादा मुनाफे का गणित काम करता है। सोचिए एक तो आप इस महंगाई के दौर में त्योहारी खुशियां मनाने के लिए मुंह मांगा पैसा खर्च कर रहे हैं। इसके बावजूद अगर आप को शुद्ध सामग्री न मिले तो कैसा लगेगा।
असंगठित नेटवर्क
सबसे बड़ी बात तो यह है कि मिलावटखोरों का बड़ा हिस्सा त्योहारी सीजन में अस्थाई सेटअप में काम करता है। त्योहार गुजरते ही इनकी अस्थाई दुकानें बंद हो जाती हैं, जिससे इनके मुख्य सरगना तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। यह लोग त्योहार के समय में गांव-देहात इत्यादि में अपना कारोबार धड़ल्ले से चलाते हैं और फिर रफू-चक्कर हो जाते हैं।
सजा और जुर्माने का भी प्रावधान
भारत में खाद्य पदार्थों में मिलावट को गंभीर अपराध माना जाता है और इसके खिलाफ मुख्य कानून Food Safety and Standards Act, 2006 है, जिसे FSSAI लागू करता है। मिलावट से जुड़ी सजा इस बात पर निर्भर करती है कि उससे उपभोक्ता को कितना नुकसान हुआ। अगर असुरक्षित खाद्य पदार्थ से स्वास्थ्य को कोई नुकसान न हुआ हो तो 6 महीने तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यदि गैर-गंभीर चोट या बीमारी हो तो एक साल तक की जेल और 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
FSSAI Laws
असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने पर सजा (धारा 59) के तहत, यदि गंभीर बीमारी या शारीरिक नुकसान होता है तो 6 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है, जबकि उपभोक्ता की मौत होने पर कम से कम 7 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना होगा। इसके अलावा, मिलावट में इस्तेमाल होने वाले ऐसे पदार्थ को रखने या बेचने पर भी अलग से जुर्माने का प्रावधान है। कानून का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा मिलावटखोरी से उपभोक्ताओं को बचाना है।
5 लाख से ज्यादा खाद्य नमूनों की हुई जांच
पीआईबी के मुताबिक, मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने बताया कि 2022-23 से 2024-25 के बीच 5,18,559 खाद्य नमूनों की जांच हुई, जिनमें उल्लंघन के मामलों में 88,192 मामलों में जुर्माना लगाया गया, 3,614 मामलों में दोषसिद्धि हुई और 1,161 लाइसेंस रद्द किए गए।
जांच क्षमता में हो रहा इजाफा
देश में खाद्य नियामक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए FSSAI ने खाद्य नमूनों की जांच के लिए 252 फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी और अपीलीय नमूनों के विश्लेषण के लिए 24 रेफरल फूड लैबोरेटरी अधिसूचित की हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी।
बकौल पीआईबी, FSSAI राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी (MFTL) यानी Food Safety on Wheels (FSW) के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है। मिलावट के खिलाफ कार्रवाई में ये मोबाइल लैब अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि इनमें विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलावट की मौके पर जांच के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। मौजूदा समय में देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 एफएसडब्ल्यू तैनात हैं।
Food Safety on wheels
मिलावट में कमी आई?
ऐसा नहीं है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ अपने घुटने टेक दिए हैं। उनकी लगातार कार्रवाई और छापेमारी की वजह से मिलावटखोरों के ज़हन में कार्रवाई का खौफ तो बैठ ही गया है। हाल ही में आप लोगों ने महाराष्ट्र में एफडीए कमिश्नर तुकराम मुढ़े द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाइयों को देख ही रहे होंगे, जिन्होंने बड़े से बड़े आउटलेट का लाइसेंस स्वच्छता के चलते रद्द कर दिया।
सरकार और FSSAI लगातार निगरानी, निरीक्षण, रैंडप सैंपलिंग और स्पेशल फेस्टिव ड्राइव चलाते हैं। FSSAI ने राज्यों को त्योहारों के दौरान खासतौर पर दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मिठाई, नमकीन, घी, मावा/खोया, पनीर और खाद्य तेल जैसे उत्पादों पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है। हालांकि, बार-बार होने वाली ऐसी कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि समस्या महज एक-दो दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में ज्यादा मुनाफा कमाने की लालच और सप्लाई चेन से जुड़ी भी हो सकती है।
कैसे करें पहचान?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मिलावटखोर आजकल दूध को ज्यादा गाढ़ा दिखाने के लिए स्टार्च, डिटर्जेंट और मैदा जैसी चीजें मिलाते हैं, जो हमारे शरीर में बुरा असर डालती है। ऐसे में हमें मिलावटी चीजों को पहचानना आना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोडीन की कुछ बूंदें दूध, पनीर या डेयरी प्रोडक्ट्स पर डालकर देखें, अगर उसका रंग काला हो जाता है तो इसका मतलब साफ है कि डेयरी प्रोडक्ट्स में मिलावट की गई है।
