अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और गुजरात फूड एंड ड्रग्स विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नकली ब्लड प्रेशर की दवाइयां बनाने और सप्लाई करने वाले कथित अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। मामले में अहमदाबाद के एक और लखनऊ के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामला तब सामने आया जब J.B. Chemicals & Pharmaceuticals Ltd. ने शिकायत की कि उनकी लाइसेंसी दवा NICARDIA RETARD 10 (NIFEDIPINE Sustained Release Tablets IP 10mg) के नकली संस्करण बाजार में बेचे जा रहे हैं। यह दवा हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाती है।
शिकायत के बाद गुजरात फूड एंड ड्रग्स विभाग ने संदिग्ध नकली दवा की सप्लाई चेन की जांच शुरू की। जांच अहमदाबाद की पालडी स्थित पाश्वा मेडिकल एजेंसी तक पहुंची, जहां से कथित तौर पर संदिग्ध स्टॉक लिया और आगे सप्लाई किया जा रहा था।
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जांच के दौरान मामले के तार लखनऊ और राजस्थान के जयपुर तक पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी असली दवा की तरह दिखने वाली नकली टैबलेट्स तैयार कर रहे थे। इन पर असली दवा से मिलते-जुलते नाम, लेबल और बैच नंबर इस्तेमाल किए जा रहे थे।
नाडियाद और भुज से भी नकली दवा बरामद
जांच के दौरान नाडियाद की किसान मेडिकल स्टोर से NICARDIA RETARD 10 की 30 संदिग्ध नकली स्ट्रिप्स बरामद की गईं। इसके अलावा भुज की महादेव मेडिकल एजेंसी और अन्य स्थानों से भी उसी बैच नंबर वाला स्टॉक बरामद किया गया।
लखनऊ से गुजरात भेजी गईं 36 हजार टैबलेट्स
जांच में सामने आया है कि लखनऊ से 3,600 स्ट्रिप्स यानी लगभग 36,000 टैबलेट्स गुजरात समेत दूसरे राज्यों में सप्लाई की गई थीं।इनमें से करीब 2,700 स्ट्रिप्स गुजरात भेजी गईं। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और गुजरात फूड एंड ड्रग्स विभाग ने अब तक करीब 1,200 स्ट्रिप्स बरामद कर ली हैं।वहीं, गुजरात भेजी गई बाकी 1,500 स्ट्रिप्स बेची जा चुकी हैं।पुलिस को आशंका है कि बेची गई दवाइयों में से कुछ का मरीजों द्वारा सेवन किया जा चुका हो सकता है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि बचे हुए स्टॉक में से कुछ दवाइयां अहमदाबाद की पाश्वा मेडिकल एजेंसी के जरिए गुजरात से बाहर सप्लाई की गई थीं या नहीं।
अहमदाबाद के आरोपी पर सप्लाई की जिम्मेदारी का आरोप
क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद निवासी दर्शिल सांघवी, उम्र 39 वर्ष को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दर्शिल ने कथित तौर पर नकली दवाइयां हासिल कर अहमदाबाद और दूसरे शहरों में सब-डिस्ट्रीब्यूटर्स को सप्लाई की।लखनऊ निवासी देवेंद्र यादव, उम्र 39 वर्ष और उमंग रस्तोगी, उम्र 34 वर्ष को भी गिरफ्तार किया गया है।पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर ज्यादा डिस्काउंट देकर नकली दवाइयां खरीदीं और उनकी गुजरात में सप्लाई की व्यवस्था की। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को जून 2026 में पुणे के विश्रामनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज नकली दवा के एक मामले में भी गिरफ्तार किया गया था।इसके अलावा पुलिस ने बताया कि उमंग रस्तोगी के खिलाफ सितंबर 2022 में GST एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।
राजस्थान, महाराष्ट्र, यूपी और बिहार तक जांच
गुजरात फूड एंड ड्रग्स विभाग के लाइजनिंग एवं कंट्रोलिंग ऑफिसर रूपम एम. पटेल के मुताबिक, विभाग को नकली और मिलावटी दवाइयों के निर्माण और बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं।विभाग ने जांच के दौरान संदिग्ध दवा के सैंपल खरीदे और उसकी सप्लाई चेन को चरणबद्ध तरीके से ट्रेस किया। इसी जांच के दौरान अहमदाबाद की पाश्वा मेडिकल एजेंसी और गुजरात के बाहर मौजूद सप्लायर्स तक टीम पहुंची।अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के ACP भरत पटेल के मुताबिक, अलग-अलग स्थानों पर जांच के लिए क्राइम ब्रांच और फूड एंड ड्रग्स विभाग की टीमें बनाई गईं। पुलिस की टीमें राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार भेजी गई हैं। जांच का उद्देश्य नकली दवाइयों के मुख्य स्रोत का पता लगाना, कथित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को ढूंढना और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार करना है।
1,500 स्ट्रिप्स की तलाश बनी बड़ी चुनौती
क्राइम ब्रांच ने कथित सप्लाई चेन में कीमतों के पैटर्न को भी जांच के दायरे में लिया है। पुलिस के मुताबिक, अगर कोई दवा सामान्य तौर पर करीब 10% मार्जिन पर होलसेलर तक पहुंचती है, लेकिन उसे 18 से 20% मार्जिन पर सप्लाई किया जा रहा है, तो यह असामान्य पैटर्न हो सकता है और इसकी जांच जरूरी है।पुलिस ने फिलहाल इस कथित नेटवर्क से जुड़े राज्यों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। पुलिस का कहना है कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सबसे अहम सवाल बेची जा चुकी 1,500 स्ट्रिप्स का है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये दवाइयां किन दुकानों और लोगों तक पहुंचीं, इनमें से कितनी दवाइयां मरीजों तक पहुंचीं और क्या कोई स्टॉक गुजरात से बाहर भी सप्लाई किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
