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बिहार चुनाव:डॉन की धरती पर किसका होगा वर्चस्व,जानें वोटिंग के दिन बाहुबलियों की पत्नियों की पीछे कौन

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  • Updated Nov 3, 2022, 01:31 PM IST

Bihar by Poll Election 2022:पटना से महज 100 किलोमीटर दूर, मौजूद मोकामा में बाहुबली अनंत सिंह और ललन सिंह के बीच हमेशा से वर्चस्व की लड़ाई रही है। अनंत सिंह का साल 2005 से इस सीट पर दबदबा रहा है। वह चाहे पार्टी में रहकर चुनाव लड़े हो या फिर निर्दलीय होकर, चुनाव जीतते रहे है।

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फाइल फोटो: मोकासा से उम्मीदवार नीलम देवी और सोनम देवी

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • AK-47 केस में अनंत सिंह की विधायकी जाने के बाद मोकामा सीट खाली हुई है।
  • ललन सिंह, मोकामा से दो बार अनंत सिंह को टक्कर दे चुके हैं। लेकिन उन्हें हार मिली है।
  • 2019 के लोक सभा चुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी मोकामा से किस्मत आजमा चुकी हैं।

Bihar by Poll Election 2022: देश के 7 सीटों पर हो रहे, उप चुनाव में जिस सीट की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह बिहार की मोकामा सीट है। इस सीट पर बाहुबलियों के वर्चस्व की लड़ाई है। और इस लड़ाई में किरदार बाहुबलियों की पत्नियां है। एक तरफ मोकामा में छोटे सरकार के रूप में मशहूर बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी राजद के टिकट पर नीलम देवी मैदान में हैं। दूसरे तरफ अनंत सिंह के प्रतिद्वंदी और बाहुबली ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी भाजपा के टिकट से मैदान में हैं। खास बात यह है इस टक्कर में दूसरे बाहुबलियों ने भी अपने गुट तय कर लिए हैं।

मोकामा में अनंत सिह और ललन सिंह में वर्चस्व की लड़ाई

पटना से महज 100 किलोमीटर दूर, मौजूद मोकामा में बाहुबली अनंत सिंह और ललन सिंह के बीच हमेशा से वर्चस्व की लड़ाई रही है। अनंत सिंह का साल 2005 से इस सीट पर दबदबा रहा है। वह चाहे पार्टी में रहकर चुनाव लड़े हो या फिर निर्दलीय होकर, चुनाव जीतते रहे है। इस समय यह सीट एके-47 केस में अनंत सिंह की विधायकी जाने के बाद खाली हुई है। अनंत सिंह हत्या, अपहरण जैसे केस दर्ज हैं। एडीआर के अनुसार साल 2020 में अनंत सिंह द्वारा दिए गए हलफनामे के अनुसार उन पर 38 केस दर्ज थे।

अनंत सिंह को राजनीतिक टक्कर ललन सिंह ही देते रहे हैं। वह 2005 में एलजेपी के टिकट पर ललन सिंह के खिलाफ मैदान में उतर चुके हैं। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वह 2015 में भी जनअधिकार पार्टी से अनंत सिंह को टक्कर दे चुके हैं। लेकिन फिर हार का सामना करना पड़ा था। इस बीच उनकी पत्नी सोनम देवी भी 2010 में अनंत के खिलाफ मैदान में उतर चुकी हैं। हालांकि वह भी जीत नहीं पाई थी। ललन सिंह अभी हाल ही में जद(यू) का साथ छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं।

1995 के बाद भाजपा पहली बार मैदान में

मोकामा सीट पर भाजपा 1995 के बाद अपना कोई उम्मीदवार उतार रही है। अभी तक यह सीट उसके गठबंधन साथियों के पास थी। ऐसे में भाजपा पहली बार अपने दम पर चुनाव लड़ रही है। हालांकि चुनाव प्रचार में उसे पूर्व लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान का साथ मिल गया है। वह सोनम देवी के समर्थन में 31 अक्टूबर को प्रचार करने मोकामा पहुंचे थे। मोकामा सीट पर भूमिहारों का दबदबा रहा है और इसी समीकरण को देखते हुए दोनों दलों ने भूमिहार उम्मीदवार ही मैदान में उतारे हैं।

डॉन भी दो गुटों में बंटे

अनंत सिंह और ललन सिंह के अलावा इस इलाके में दूसरे बाहुबली या डॉन ने भी चुनाव में गुट बना लिए हैं। एक तरफ जहां पूर्व सांसद और डॉन सूरजभान सोनम देवी को सपोर्ट कर रहे हैं। वहीं विवेक पहलवान नीलम देवी को सपोर्ट कर रहे हैं। यानी इस चुनाव में भी दूसरे बाहुबालियों ने भी अपने पाले फिक्स कर लिए हैं। साफ है कि 6 तारीख को आने वाले नतीजे बेहद अहम राजनीतिक संदेश देंगे।

क्या होगा असर

इस उप चुनाव की खास बात यह है कि इस बार नीतीश कुमार तेजस्वी यादव के साथ चले गए हैं। और भाजपा अकेले चुनाव लड़ रही है। ऐसे में अगर अनंत सिंह जीतते हैं तो, उनकी परंपरागत सीट होने की वजह से कोई बड़ा राजनीतिक संदेश नहीं जाएगा। लेकिन अगर भाजपा यह चुनाव जीत जाती है, तो उसके बड़े मायने होंगे। पहला तो अनंत सिंह की राजनीतिक वर्चस्व टूट जाएगा, वहीं नीतीश और तेजस्वी की जोड़ी को बड़ा झटका लगेगा। और इसके लिए, रिजल्ट के दिन 6 नवंबर का इंतजार करना होगा।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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