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इस्तीफे के बाद पहली बार क्या बोले नीतीश कुमार? अब क्या होगा बिहार का भविष्य; जानिए

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 28, 2024, 11:54 AM IST

Nitish Kumar Resigns News in Hindi: बिहार की सियासत पर छाए बादल धीरे-धीरे साफ होने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह से चल रहा पॉलिटिकल ड्रामा नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ खत्म हो गया है।

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नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया

Photo : ANI

Nitish Kumar Resigns: नीतीश कुमार के इस्तीफ के बाद बिहार में चल रही सियासी अटकलों पर भी विराम लग गया है। नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पाला बदलकर महागठबंधन का साथ छोड़ दिया है। तय स्क्रिप्ट के तहत नीतीश कुमार सुबह राजभवन पहुंचे और उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि अब भाजपा उन्हें समर्थन देगी, जिसके बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा।

हालांकि, इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा, हमने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। हमने सरकार भंग करने के लिए भी राज्यपाल से कहा है। नीतीश कुमार ने बताया कि पार्टी की राय के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा है।

1.5 साल में ठीक नहीं लगी स्थिति

नीतीश कुमार ने बताया, पिछले 1.5 साल में हमें महागठबंधन में स्थिति ठीक नहीं लगी, इसलिए आज हम आरजेडी से अलग हो गए। बीच में हम बहुत कुछ बोलना चाह रहे थे, लेकिन हम बोल नहीं रहे थे। हमने बोलना छोड़ दिया था। आगे नीतीश कुमार ने कहा कि आज जो कुछ होगा आप लोग रहेंगे देख लेना सब। जितना काम हम किए, इतने लोगों का गठबंधन कराए, पर कोई काम ही नहीं कर रहा था।

जदूय नेताओं के साथ मीटिंग में भावुक हुए नीतीश कुमार

जानकारी के मुताबिक, इस्तीफा देने से पहले जदयू नेताओं संग बैठक के दौरान नीतीश कुमार बहुत भावुक नजर आए। नीतीश ने बैठक में जदयू नेताओं से कहा कि 'मैंने हर वो कोशिश की जिससे सरकार को बेहतर तरीके से चलाया जा सके, लेकिन मैं जदयू के मूल्यों से कोई समझौता नहीं करूंगा। नीतीश ने बैठक में साफ कर दिया कि वो जदयू में दरार डालने की कई कोशिशें की गई।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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