Bhojshala Verdict: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर में आज बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालुओं ने परिसर में प्रवेश किया और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और प्रार्थना की। बता दें कि शुक्रवार को हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला साइट को आधिकारिक तौर पर मंदिर बताया गया।
लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद के बाद आए इस ऐतिहासिक अदालती फैसले को हिंदू पक्ष अपनी एक बड़ी जीत मान रहा है। शनिवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें भोजशाला परिसर के बाहर देखी गईं, जो जय श्रीराम और वाग्देवी (माता सरस्वती) के जयकारों के साथ परिसर के भीतर दाखिल हुए।
क्या है हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला?
यह विवाद दशकों पुराना है, जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पुरातात्विक साक्ष्यों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और एएसआई (ASI) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला साइट को मूल रूप से एक हिंदू मंदिर माना।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह परिसर ऐतिहासिक रूप से माता सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर है। इस फैसले के आने के बाद से ही हिंदू समाज को नियमित रूप से यहां पूर्ण अधिकार के साथ पूजा करने की अनुमति मिल गई है, जिसका श्रद्धालु लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए धार जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद है। भोजशाला परिसर और उसके आसपास के पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।
सीसीटीवी से निगरानी
परिसर के भीतर और बाहर चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है। प्रशासन और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने दोनों पक्षों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
क्या है भोजशाला का इतिहास और विवाद?
भोजशाला को लेकर मान्यता है कि इसका निर्माण 11वीं सदी में परमार राजवंश के राजा भोज ने करवाया था, जो कि सरस्वती माता का एक भव्य मंदिर और अध्ययन केंद्र था। हालांकि, बाद में मुस्लिम काल के दौरान इसके कुछ हिस्सों को मस्जिद (कमल मौला मस्जिद) के रूप में तब्दील कर दिया गया था।
इससे पहले के एएसआई (Archaeological Survey of India) के आदेश के मुताबिक, यहां की व्यवस्था एक समझौते के तहत चल रही थी, जिसमें हिंदुओं को हर मंगलवार को पूजा करने और मुस्लिमों को हर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति थी। लेकिन अब, हाई कोर्ट द्वारा इसे मंदिर घोषित किए जाने के बाद इस परिसर की पूरी कानूनी और धार्मिक स्थिति बदल गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष आने वाले दिनों में ऊपरी अदालत का रुख कर सकता है।
