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सपा सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ मुकदमा वापस लेंगे बाबा गोरखनाथ, मिल्कीपुर में उपचुनाव का रास्ता साफ

Milkipur Assembly Seat By Election: चुनाव आयोग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश की नौ सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी। हालांकि, अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट का मुकदमा अदालत में लंबित होने के कारण इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा नहीं की गई थी।

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मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का रास्ता साफ।

Photo : PTI

Milkipur Assembly Seat By Election: उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद से पराजित होने के बाद निर्वाचन से संबंधित मुकदमा दाखिल करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी बाबा गोरखनाथ अपनी याचिका वापस लेंगे। इसी के साथ मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का रास्ता भी साफ हो गया है।

बता दें, मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार को नयी दिल्ली में उत्तर प्रदेश विधानसभा की नौ सीट पर उपचुनाव के लिए कार्यक्रम की घोषणा की। हालांकि, आयोग ने राज्य की मिल्कीपुर सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा फिलहाल नहीं की। चुनाव आयुक्त ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि अदालत में मामला लंबित होने के कारण इस सीट पर उपचुनाव नहीं कराया जा रहा है। अब सामने आया है कि पूर्व भाजपा विधायक बाबा गोरखनाथ ने मंगलवार को कहा कि वह मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराने का रास्ता साफ करने के लिए सपा सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ उच्च न्यायालय से मुकदमा वापस लेंगे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है मामला

मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा इसलिए नहीं की गई क्योंकि पूर्व भाजपा विधायक बाबा गोरखनाथ ने अवधेश प्रसाद के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और यह मामला अब भी लंबित है। यह मामला अवधेश प्रसाद द्वारा नामांकन दाखिल करते समय गलत शपथ लेने से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि अवधेश प्रसाद के दस्तावेजों को सत्यापित करने वाले नोटरी के पास उस तारीख को नवीनीकृत लाइसेंस नहीं था। उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दस्तावेज सत्यापन की तारीख पर नोटरी के अधिवक्ता के पास वैध लाइसेंस होना आवश्यक है। पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ ने कहा, मैं एक सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय से यह मुकदमा वापस ले लूंगा क्योंकि मैंने और एक अन्य व्यक्ति ने रिट दायर की है। हमने उपचुनाव का रास्ता साफ करने के लिए मुकदमा वापस लेने का फैसला किया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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