रामपुर की जिला एवं सत्र अदालत ने नफरत भरा भाषण (hate speech) देने के मामले में समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan) को एमपी/एमएलए अदालत से मिली तीन साल की सजा को चुनौती देने वाली याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। इस स्थिति के मुताबिक आजम खान की तीन साल वाली सजा भी बरकरार रहने वाली है और उनकी सदस्यता भी रद्द ही रहेगी
गौर हो कि नफरत भाषण के मामले में दोष सिद्धी को चुनौति देने वाली समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की याचिका पर फैसला बृहस्पतिवार शाम चार बजे के बाद आना था वो आ गया है।
इसे आजम खान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। रामपुर की एमपी/एमएलए अदालत ने 27 अक्टूबर को नफरत भाषण मामले में खान को दोषी करार देते हुए उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी जिसके कारण उनके विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो गई। हालांकि, अदालत ने उन्हें तत्काल जमानत देते हुए दोष सिद्धी को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का वक्त भी दिया था।
याचिका पर तत्काल सुनवाई कर उसका निपटारा करने को कहा
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को रामपुर अदालत से खान की उक्त याचिका पर तत्काल सुनवाई कर उसका निपटारा करने को कहा। साथ ही उसने खान की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया में तेजी को लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा की भी आलोचना की।सुनवाई में मौजूद एक वकील ने बताया कि एमपी/एमएल अदालत ने बृहस्पतिवार को खान और सरकारी वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
बतौर साक्ष्य पेश की गई कथित सीडी पर सवाल उठाये
दलीलों में खान के वकीलों ने 2019 के इस मामले में बतौर साक्ष्य पेश की गई कथित सीडी पर सवाल उठाये और सजा पर रोक लगाने की मांग की।
वहीं, अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा कि आजम खान ने कभी यह नहीं कहा है कि यह उनका भाषण नहीं था, उस वक्त वह सांसद थे और भाषण देते समय उन्हें जिम्मेदार होना चाहिए था।
