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Ayodhya New Airport Name: अयोध्या के नए एयरपोर्ट को मिला नाम, महर्षि वाल्मीकी के नाम से जाना जाएगा हवाई अड्डा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 28, 2023, 09:02 PM IST

Ayodhya New Airport Name: अयोध्या में बने नए एयरपोर्ट को महर्षि वाल्मिकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या धाम के नाम से जाना जाएगा। पीएम मोदी 30 दिसंबर को इसका उद्धाटन करेंगे।

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अयोध्या एयरपोर्ट

Photo : BCCL

Ayodhya New Airport Name:अयोध्या में बने नए एयरपोर्ट का नाम तय कर दिया गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि अयोध्या में बने नए एयरपोर्ट को महर्षि वाल्मिकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या धाम के नाम से जाना जाएगा। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 दिसंबर को अयोध्या में बने इस एयरपोर्ट का उद्घाटन करने वाले हैं।

इससे पहले बुधवार को अयोध्या रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अयोध्या धाम कर दिया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मांग पर रेलवे ने स्टेशन के नाम में बदलाव किया था। बता दें, 22 दिसंबर, 2023 को अयोध्या के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का ट्रायल किया गया था।

30 दिसंबर को उतरेगी पहली उड़ान

जानकारी के मुताबिक, एयरलाइंस कंपनी इंडिगो की दिल्ली से पहली उड़ान 30 दिसंबर को अयोध्या के हवाई अड्डे पर उतरेगी। हालांकि, कंपनी की ओर से व्यवसायिक सेवाएं 6 जनवरी से शुरू होंगी। इसके अलावा 15 जनवरी से अयोध्या से मुंबई के लिए सीधी उड़ान सेवा भी शुरू हो जाएगी।

1450 करोड़ से तैयार हो रहा हवाई अड्डा

अयोध्या के अत्याधुनिक हवाई अड्डे को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। पहले चरण में हवाई अड्डे पर 1450 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। एयरपोर्ट का टर्मिनल 6500 वर्गमीटर का होगा, जो सालाना लगभग 10 लाख यात्रियों की सेवा के लिए सुसज्जित किया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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