UPSC Prelims 2026: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 की प्रोविजनल आंसर की (Provisional Answer Key) को लेकर विवाद गहरा गया है। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने पूछे गए 27 प्रश्नों के उत्तरों को चुनौती देते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की शरण ली है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि आधिकारिक उत्तर कुंजी में कई जवाब गलत हैं, कुछ प्रश्नों में एक से अधिक विकल्प सही पाए गए हैं और कुछ के सही उत्तर विकल्पों में मौजूद ही नहीं हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने आयोग से जवाब तलब किया है।
परीक्षा से संबंधित मुख्य जानकारी
| परीक्षा का नाम | यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 |
| परीक्षा की डेट | 24 मई 2026 |
| मामले की स्थिति | सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में विचाराधीन |
| चिकाकर्ताओं की संख्या | कुल 67 अभ्यर्थी (4 + 63 उम्मीदवारों के दो अलग-अलग समूह) |
| विवादित प्रश्न | जनरल स्टडीज पेपर-I के कुल 27 सवाल |
| CAT की अगली सुनवाई | 8 अक्टूबर 2026 |
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किन-किन प्रश्नों और विषयों पर उठी हैं आपत्तियां?
अभ्यर्थियों ने इतिहास, कानून, खेल और कृषि से जुड़े कई प्रश्नों में तथ्यात्मक कमियों और भाषाई अंतर का हवाला दिया है। इस संबंध में एक जीरो एफआईआर भी फाइल की गई है। इस जीरो FIR' से संबंधित प्रश्न के हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद में शब्दों के अंतर से अर्थ बदलने का मुद्दा उठाया गया है। अभ्यर्थियों ने सवाल खड़ा किया है कि जब दोनों भाषाओं के वर्जन अलग हों, तो सही अर्थ कैसे समझा जाए। इसके साथ ही उम्मीदवारों ने ऋग्वैदिक काल में सिंचाई हेतु 'अंशु चक्र' और 'अहवा' के प्रयोग से जुड़े प्रश्न पर सरकारी स्रोतों तथा उत्तर कुंजी के जवाब में भिन्नता बताई गई है। खेल वर्ग की बात करें तो इसमें ग्रैंड स्लैम के नियमों तथा रैंकिंग की शर्तों से जुड़े प्रश्न के उत्तर पर भी आपत्ति जताई गई है।
कट-ऑफ और नतीजों पर असर
सिविल सेवा परीक्षा में प्रत्येक सही और गलत उत्तर अभ्यर्थियों का कट-ऑफ और स्कोर को तय करने का काम करता है। इससे रैंक पर असर पड़ता है। परीक्षा में अंकों का बहुत मामूली अंतर या गलत उत्तर कुंजी के आधार पर हुआ मूल्यांकन किसी भी योग्य उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा की दौड़ से बाहर कर सकता है। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण मामला है।
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अब आगे क्या होगा?
ट्रिब्यूनल (CAT) द्वारा इस संबंध में यूपीएससी को नोटिस जारी कर दिया गया है। अब इससे यूपीएससी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। बता दें कि मामले की सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी। उसके बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा कि क्या आंसर की या विवादित प्रश्नों के मूल्यांकन में किसी बदलाव की आवश्यकता है या नहीं।
