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अटॉर्नी जनरल का कार्यकाल 2 साल के लिए बढ़ा, जानें कौन हैं आर. वेंकटरमणी

वरिष्ठ अधिवक्ता आर. वेंकटरमणी भारत के अटॉर्नी जनरल के पद पर बने रहेंगे। उनका वर्तमान तीन साल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है।

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अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी का कार्यकाल 2 साल के लिए बढ़ा (फोटो-ट्विटर)

दिल्ली : वरिष्ठ अधिवक्ता आर. वेंकटरमणी भारत के अटॉर्नी जनरल के पद पर बने रहेंगे। कानून मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, आर वेंकटरमणी को दो साल के नए कार्यकाल के लिए फिर से भारत का अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता आर. वेंकटरमणी को शुक्रवार को दो साल के लिए भारत का अटॉर्नी जनरल फिर से नियुक्त किया गया। उन्हें 1 अक्टूबर से देश के शीर्ष विधि अधिकारी के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है। उनका वर्तमान तीन साल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। वेंकटरमणी (75) ने 30 सितंबर, 2022 को वरिष्ठ न्यायविद के. के. वेणुगोपाल का स्थान लेते हुए अटॉर्नी जनरल का पद संभाला था। उन्होंने अगले दिन अपना कार्यभार ग्रहण किया। अटॉर्नी जनरल एक संवैधानिक पद है और केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।

वेंकटरमणी के बारे में

वेंकटरमणी का जन्म 13 अप्रैल 1950 को पॉडिचेरी में हुआ। वेंकटरमणि जुलाई 1977 में तमिलनाडु बार काउंसिल में एक वकील के रूप में नामांकित हुए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आर वेंकटरमणी एक वकील हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में लंबा अनुभव है. जुलाई 1977 में बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु में दाखिला लेने के बाद 1979 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव के साथ काम किया।

इसके बाद वेंकटरमणी ने 1982 में सर्वोच्च न्यायालय में एक स्वतंत्र अभ्यास की स्थापना की। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से उन्हें 1997 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया, फिर उन्हें 2010 में मेंबर ऑफ लॉ कमीशन और फिर 2013 में एक और कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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