ATF Prices: "भारत में विमानन उद्योग अत्यधिक संकट में है और बंद होने या परिचालन रोकने के कगार पर है।" एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सरकार को भेजे गए एक आपातकालीन संदेश में यह गंभीर चेतावनी जारी की है। इसमें विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) की कीमतों में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
ATF की कीमत में लगातार बढ़ोतरी
कई अहम विधानसभा चुनावों के बीच सरकार ने अप्रैल माह के लिए घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ के आधार मूल्य में 25 प्रतिशत की वृद्धि को सीमित कर दिया था, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इसमें 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई थी। अब मई माह के लिए मासिक संशोधन इसी सप्ताह होने वाला है। विमानों ने एटीएफ के उचित मूल्य निर्धारण, घरेलू परिचालन के लिए एटीएफ पर 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क के अस्थायी निलंबन और प्रमुख राज्यों में वैट दरों में कमी की मांग की है।
FIA ने क्या-क्या कहा?
FIA ने कहा है, 'भारत के सबसे बड़े विमानन केंद्र दिल्ली में वैट की दर 25 प्रतिशत के साथ भारत में दूसरे स्थान पर है। तमिलनाडु में यह दर 29 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक है। मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे अन्य प्रमुख विमानन केंद्रों में वैट की दर 16 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच है। ये छह शहर भारत के भीतर 50 प्रतिशत से अधिक एयरलाइन संचालन को कवर करते हैं। भारत में एयरलाइनों के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, एफआईए एटीएफ की लागत संबंधी चुनौतियों की समीक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करता है।'
एफआईए ने पिछले सप्ताह विमानन सचिव समीर सिन्हा को भेजे पत्र में कहा, 'एफआईए ने एटीएफ की मौजूदा मनमानी मूल्य निर्धारण प्रणाली में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में गंभीर असंतुलन पैदा हो रहा है और एयरलाइन नेटवर्क अव्यवहार्य और अस्थिर हो रहे हैं। पश्चिम एशिया युद्ध और एटीएफ की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि ने विमानन क्षेत्र की दयनीय स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।'
एयरलाइंस बेहद कठिन, नाजुक स्थिति में
एफआईए के पत्र में आगे कहा गया है, पहले एटीएफ एयरलाइनों की लागत का 30-40 प्रतिशत था, जो अप्रैल में हुई वृद्धि के बाद बढ़कर 55-60 प्रतिशत हो गया, जिससे पूरी तरह से परिचालन असंभव हो गया। रुपये के गिरने से उनकी लागत संबंधी परेशानियां और बढ़ गईं। एयरलाइंस बेहद कठिन, नाजुक और चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं। हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण बढ़ती लागत और अतिरिक्त परिचालन खर्चों के बावजूद एयरलाइंस अब तक किसी तरह परिचालन का प्रबंधन कर रही हैं…वित रहने, परिचालन जारी रखने और संचालन को बनाए रखने के लिए, हम आपसे मौजूदा स्थिति से उबरने के लिए तत्काल और सार्थक वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध करते हैं।
इसमें आगे कहा गया है, डीजल और पेट्रोल जैसे अन्य ईंधनों के लिए मूल्य नियंत्रण तंत्र मौजूद है, जो एटीएफ के लिए नहीं है और एटीएफ की कीमत इसके उत्पादन लागत की तुलना में काफी अधिक है। एटीएफ भारत के रिफाइनरी उत्पादन का मात्र 4 प्रतिशत है। भारत में उत्पादित 4 प्रतिशत एटीएफ में से सिर्फ 30 प्रतिशत घरेलू एयरलाइंस द्वारा और 20 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस द्वारा उपयोग किया जाता है, जबकि 50 प्रतिशत एटीएफ का निर्यात किया जाता है।
