Amit Shah: भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद से हटाने वाले विधेयक पर सियासी हंगामा जारी है और विपक्ष इसे लेकर सरकार खास तौर पर गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर ले रहा है। इन सबके बीच गृह मंत्री अमित शाह ने खुद के जेल जाने के मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया है। अमित शाह ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कई मुद्दों पर विस्तार से बात की। भ्रष्टाचार के आरोप में PM और CM को पद से हटाने वाले विधेयक को लेकर शाह ने बताया कि जब उनपर आरोप लगे थे तो उन्होंने क्या कदम उठाए थे।
सीबीआई से समन मिलते ही इस्तीफा दे दिया था
विपक्ष द्वारा उनकी नैतिकता और जेल में बिताए समय पर सवाल उठाए जाने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, सीबीआई से समन मिलते ही मैंने अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया था। बाद में मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। मामला चलता रहा और फैसला आया कि यह राजनीतिक बदले की भावना से किया गया मामला है और मैं पूरी तरह निर्दोष हूं। फैसला बाद में आया, मुझे जमानत पहले ही मिल गई...फिर भी, मैंने शपथ नहीं ली और दोबारा गृह मंत्री नहीं बना। इतना ही नहीं, मैंने तब तक किसी संवैधानिक पद की शपथ नहीं ली जब तक मेरे खिलाफ लगे सभी आरोप पूरी तरह से खारिज नहीं हो गए। विपक्ष मुझे नैतिकता का कौन सा पाठ पढ़ा रहा है?
आफताब आलम की कृपा से मेरी जमानत याचिका 2 साल तक चली
जस्टिस आफताब आलम के उनके आवास पर हस्ताक्षर लेने आने की मीडिया रिपोर्ट्स के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, नहीं, ऐसा नहीं हुआ। आफताब आलम मेरे घर कभी नहीं आए। उन्होंने रविवार को एक विशेष अदालत लगाई और मेरी जमानत याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री होने के नाते अमित शाह सबूतों को प्रभावित करेंगे। इसलिए मेरे वकील ने कहा कि अगर आपको यही डर है, तो जमानत याचिका पर फैसला आने तक हमारे मुवक्किल गुजरात से बाहर रहेंगे। मैं दो साल बाहर रहा क्योंकि भारत के इतिहास में किसी की जमानत याचिका दो साल तक नहीं चली। आफताब आलम की कृपा से मेरी जमानत याचिका 2 साल तक चली। ज्यादा से ज्यादा जमानत याचिका 11 दिन तक चलती है।
130वें संशोधन विधेयक में 30 दिन की जमानत अवधि पर विपक्ष की आपत्ति पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मेरे मामले को छोड़कर, सुप्रीम कोर्ट में जमानत का कोई भी मामला पांच दिन से ज्यादा नहीं चला।
