नई दिल्ली। अयोध्या टाइटल सूट केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। 5-0 से पीठ ने माना कि विवादित जमीन पर रामलला का हक है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई के रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुये कहा कि एएसआई ने विस्तृत रूप से जो कुछ हासिल किया था वो इस बात की पुष्टि करता है कि विवादित जमीन पर मंदिर अस्तित्व में था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एएसआई के पूर्व चेयरमैन के के मोहम्मद ने कहा कि वो सोचते हैं कि यह सबसे आदर्श फैसला है। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने खुदाई में मिले एक एक संरचना की गहराई से जांच पड़ताल की थी और पाया कि विवादित जमीन पर बड़ा मंदिर था। स्तंभों के ऊपर जो नक्काशियां मिली थीं उनका इस्लामिक शैली से दूर दूर तक रिश्ता नहीं था। जैसे इस्लाम में प्राफेट मोहम्मद को पूज्यनीय माना जाता है ठीक वैसे ही हिंदू समाज के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम का स्थान है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की खुदाई में जो कुछ हासिल हुआ था उसका बारीकी से विश्लेषण किया गया।विवादित जमीन से मिले साक्ष्यों को बारीकी से जांच परख के बाद ये पाया गया है कि जो कुछ प्रतीक चिन्ह मिले थे उसका इस्लामिक आर्किटेक्चर या शैली से नाता नहीं था। यहां तक कि मुस्लिम पक्ष भी एएसआई के दावे को ठुकरा नहीं सका। विवादित परिसर के बाहर रामचबूतरे पर भी मुस्लिम पक्षकारों ने माना कि वो राम का जन्म स्थान था। एएसआई ने सीता रसोई और रामचबूतरा के बारे में पुरातात्विक साक्ष्यों का हवाला दिया था जिसे मुस्लिम पक्षकार इनकार नहीं कर सके।
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