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आंध्र प्रदेश में स्क्रब टाइफस का कहर, राज्यभर में 1,500 से अधिक मामले, अबतक 9 लोगों की मौत

आंध्र प्रदेश में संदिग्ध स्क्रब टाइफस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसमें अब तक 1,500 से अधिक सकारात्मक मामले सामने आए हैं। राज्य सरकार ने इसके प्रसार को रोकने और मौतों के कारण का सही पता लगाने के लिए व्यापक जांच और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की तैनाती की है। जनता को बीमारी की प्रारंभिक पहचान और समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए जागरूक करने के अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

Andhra Pradesh Reports Rise in Suspected Scrub Typhus (Photo: Canva)

आंध्र प्रदेश में स्क्रब टाइफस के मामलों में बढ़ोतरी (फोटो: Canva)

Andhra Pradesh Scrub Typhus Cases: आंध्र प्रदेश के चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त जी. वीरपांडियन ने सोमवार को बताया कि राज्य में संदिग्ध स्क्रब टाइफस (Scrub Typhus) रोग के कारण 9 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में स्क्रब टाइफस के लिए डायग्नोस्टिक परीक्षण किए जा रहे हैं और नमूनों को गुंटूर और तिरुपति में जीनोम सीक्वेंसिंग परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। वीरपांडियन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अभी तक स्क्रब टाइफस के कारण किसी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जीनोम सीक्वेंसिंग से मौत का सटीक कारण पता चलेगा।”

आयुक्त ने यह भी बताया कि अब तक आंध्र प्रदेश में 1,500 से अधिक सकारात्मक मामले सामने आ चुके हैं, और इन मामलों की संख्या में वृद्धि का कारण परीक्षण में विस्तार को बताया गया है। वीरपांडियन के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर कर्नाटक और तमिलनाडु में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि आंध्र प्रदेश में मामलों की संख्या पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम है। उच्च संख्या में मामलों या असामान्य मौतों वाले क्षेत्रों में महामारी संबंधी जांच करने के लिए सभी 26 जिलों में त्वरित प्रतिक्रिया टीमें (RRTs) तैनात की गई हैं। ये टीमें आवासीय क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा भी करेंगी और आवश्यक सावधानियां बरतेंगी।

कृषि, पंचायत राज और अन्य विभागों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि जनता को बीमारी का शुरुआती पता लगाने, रोकथाम के उपाय अपनाने और समय पर चिकित्सीय सहायता लेने के बारे में शिक्षित किया जा सके। गुंटूर सरकारी सामान्य अस्पताल (GGH) के अधीक्षक डॉ. रमण यशस्वी ने बताया, “सामान्यतः कीड़े के काटने से त्वचा पर काली परत बन जाती है। रक्त के नमूने लेकर एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट असे (ELISA) परीक्षण से स्क्रब टाइफस की शीघ्र पुष्टि की जा सकती है।” अन्य अधिकारियों ने कहा कि किसी मौत के स्क्रब टाइफस से होने की पुष्टि के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग आवश्यक है, जो भविष्य में मामलों की समझ और रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है।

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 Nilesh Dwivedi
Nilesh Dwivedi author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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