केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति कायम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश को भले ही 77-78 साल पहले आजादी मिल गई थी,लेकिन बस्तर में असली आजादी का सूर्योदय 31 मार्च 2026 के बाद हुआ है।
शाह नक्सलवाद समाप्ति की घोषणा के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचे, जहां उन्होंने नेतानार गांव में पहले जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया। यह केंद्र पहले सुरक्षा कैंप था, जिसे अब आदिवासी कल्याण और सरकारी सेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यहां बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि 21 जनवरी 2024 और 31 मार्च 2026 ये दो दिन नक्सल उन्मूलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाएंगे। 21 जनवरी 2024 को हमने बंद कमरे में यह तय किया था कि 31 मार्च 2026 से पहले हम नक्सलवाद को समाप्त कर देंगे। काफी लोगों ने चेताया भी था,और कमरे में चर्चा भी हुई थी कि क्या यह संभव है। मगर हमने कार्ययोजना बनाई, उसका प्रभावी क्रियान्वयन किया और अगस्त आते-आते इसकी सार्वजनिक घोषणा भी कर दी। मां दंतेश्वरी की कृपा से आज नक्सल-मुक्त बस्तर का दिन अंततः आ ही गया।
बस्तर के विकास में हुई देरी की पूरी भरपाई होगी
उन्होंने कहा कि बस्तर के विकास में हुई देरी की पूरी भरपाई की जाएगी और केंद्र व राज्य सरकार क्षेत्र को नई पहचान देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। शाह ने लोगों से विकास कार्यों में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विकास को रोकने वाली ताकतें कभी क्षेत्र का भला नहीं कर सकतीं।
गृह मंत्री ने बताया कि बस्तर में मौजूद लगभग 196 सुरक्षा कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ साल में आधुनिक जन सुविधा केंद्रों में बदला जाएगा। इन केंद्रों का डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनको दी जाएगी। यहां बैंकिंग, सरकारी योजनाएं, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
शाह ने कहा कि जिस जगह कभी पुलिसकर्मियों की हत्या होती थी, स्कूल और अस्पताल उजाड़ दिए जाते थे, वहां अब विकास और सेवा का नया मॉडल तैयार किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद की वजह से दशकों तक क्षेत्र में बिजली, पानी, शिक्षा, राशन और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं।
आदिवासी नेता गुंडा धर को किया याद
अपने संबोधन में शाह ने आदिवासी नेता गुंडा धर को याद करते हुए कहा कि उनकी भूमि देश के लिए तीर्थ समान है। उन्होंने 1910 के भूमकाल विद्रोह का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी प्रेरणा से अब सुरक्षा कैंपों को सेवा केंद्रों में बदला जा रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद खत्म करने का उद्देश्य सिर्फ हथियारबंद लोगों का सफाया करना नहीं था, बल्कि बस्तर के आदिवासी परिवारों तक वही सुविधाएं पहुंचाना था जो दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार अब बस्तर में डेयरी विकास पर भी बड़ा काम करेगी। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से हर गांव तक डेयरी नेटवर्क पहुंचाया जाएगा और आदिवासी महिलाओं को दो-दो पशु उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वन उपज के साथ डेयरी भी रोजगार का मजबूत साधन बन सके। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
