लोकसभा में सोमवार को देश की आंतरिक सुरक्षा पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि भारत अब नक्सलवाद के खात्मे की दहलीज पर खड़ा है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में नक्सलवाद को पनपने का मौका मिला और आदिवासियों को जानबूझकर विकास से दूर रखा गया। बता दें कि पिछले साल शाह ने घोषणा की थी कि देश से नक्सलवाद 31 मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएगा और इसके खिलाफ एक बड़ा अभियान नक्सलियों पर चलाया गया।
अमित शाह का कांग्रेस पर प्रहार
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में से 60 साल तक कांग्रेस सत्ता में रही, लेकिन उसने कभी भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के आदिवासियों के कल्याण के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए। उन्होंने सवाल किया कि इन दशकों में आदिवासियों तक पक्के घर, साफ पानी, राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंचीं? शाह ने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद केवल गरीबी के कारण नहीं फैला, बल्कि एक खास वामपंथी विचारधारा के कारण इसे बढ़ावा मिला।
इंदिरा गांधी से मनमोहन सिंह तक का किया जिक्र
अमित शाह ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी घेरे में लिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की शुरुआत 1970 के दशक में हुई, जब राजनीतिक लाभ के लिए वामपंथी विचारधारा को स्वीकार किया गया। शाह ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को लेकर भी कहा कि उन्होंने स्वीकार किया था कि कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट की तुलना में भी देश में आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या माओवादी हैं, लेकिन उस समय इसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति की कमी थी। मनमोहन सिंह जी ने पूरे देश के सामने स्वीकार किया था कि राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी खुद नक्सली हो गए। वो कई बार नक्सली समर्थकों के साथ दिखे हैं।
"CPI (ML) ही आज के नक्सली"
गृह मंत्री ने वामपंथी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज के नक्सली उसी CPI (ML) विचारधारा की उपज हैं जिन्होंने विदेशी माओवादी विचारधारा को अपना आदर्श माना। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नक्सलियों के आदर्श 'भगत सिंह' या 'बिरसा मुंडा' नहीं, बल्कि विदेशी विचारक हैं।
बस्तर में थमा 'लाल आतंक'
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जो इलाका कभी नक्सलियों का गढ़ था, वह अब लगभग मुक्त हो चुका है। मोदी सरकार ने वहां हर गांव में स्कूल और राशन की दुकानें खोलीं। सभी निवासियों को 5 किलो मुफ्त अनाज और आधार कार्ड उपलब्ध कराए। सुरक्षा बलों की तैनाती और विकास कार्यों के संगम से नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर किया।
