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बगावत के बाद पहली बार चाचा शरद पवार के घर पहुंचे अजित पवार, मंत्रिमंडल विस्तार के कुछ घंटों बाद हुई मुलाकात

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 15, 2023, 07:29 AM IST

Maharashtra Politics: एनसीपी के एक पदाधिकारी के मुताबिक, शरद पवार की पत्नी प्रतिभा पवार को शुक्रवार को सर्जरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, जिसके बाद उनसे मुलाकात करने के लिए अजित पवार सिल्वर ओक पहुंचे थे।

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Ajit Pawar- Sharad Pawar

Photo : BCCL

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में एनसीपी में फूट के बाद पहली बार अजित पवार अपने चाचा शरद पवार के घर पहुंचे। शुक्रवार रात उन्होंने शरद पवार के आवास सिल्वर ओक में उनसे मुलाकात की। खास बात यह है कि दोनों के बीच यह मुलाकात मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा कैबिनेट विस्तार के कुछ घंटो बाद हुई। एनसीपी के एक पदाधिकारी के मुताबिक, शरद पवार की पत्नी प्रतिभा पवार को शुक्रवार को सर्जरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, जिसके बाद उनसे मुलाकात करने के लिए अजित पवार सिल्वर ओक पहुंचे थे।

बता दें, अजित पवार अपनी चाचाी और एनसीपी नेताओं में काकी के नाम से मशहूर प्रतिभा पवार के बहुत करीब माने जाते हैं। कहा जाता है कि जब अजित पवार ने 2019 में पार्टी में बगावत की थी, तो शरद पवार की पत्नी का उन्हें पार्टी में वापस लाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा था। हालांकि, प्रतिभा पवार कभी भी राजनीति में सक्रिय नहीं रहीं।

शुक्रवार को ही हुआ था कैबिनेट विस्तार

बता दें, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को ही कैबिनेट विस्तार किया था। मंत्रिमंडल में अजित पवार के गुट क वित्त व चिकित्सा शिक्षा समेत छह विभाग दिए गए थे। इसमें वित्त एवं योजना विभाग अजित पवार अपने पास ही रखेंगे। इसके अलावा एनसीपी से आए छगन भुजबल को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलीप वलसे पार्टि के पास सहकार मंत्रालय रहेगा।

एनसीपी ने किय कटाक्ष

महाराष्ट्र में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद शरद पवार गुट वाली एनसीपी ने भाजपा पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र एनसीपी में हुई बगावत के पीछे भाजपा है। यह उनकी वॉशिंग मशीन योजना का एक हिस्सा है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, भाजपा अजित पवार पर राज्य के सहकारी क्षेत्र में घोटाले का आरोप लगाती रही है अब उनके ही गुट के एक मंत्री को इस विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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