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क्या NCP में सबकुछ ठीक नहीं? नेता प्रतिपक्ष का पद क्यों छोड़ना चाहते हैं अजित पवार

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 21, 2023, 09:03 PM IST

अजित पवार ने कहा है कि मुझे नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम करने में कभी दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन पार्टी विधायकों की मांग पर यह भूमिका स्वीकार की थी। मुझे पार्टी संगठन में कोई भी पद दे दें। मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसके साथ पूरा न्याय करूंगा।

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अजित पवार

Photo : BCCL

Ajit Pawar: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में सबकुछ ठीक चल रहा है? क्या सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाने से अजित पवार नाराज हैं? क्या शरद पवार पार्टी में उनकी भूमिका को समेटना चाहते हैं? ये सभी सवाल एक बार फिर से खुलकर सामने आ गए हैं। पूरा मामला अजित पवार के हालिया बयान से जुड़ा है।

दरअसल, अजित पवार ने बुधवार को कहा है कि वह नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं और पार्टी में कोई भूमिका चाहते हैं। अजित पवार ने यह मांग बुधवार को मुंबई में आयोजित राकांपा के 24वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान रखी। अजित पवार के इस बयान ने फिर से अटकलों को जन्म दे दिया है।

अजित पवार ने क्या कहा?

ताजा अटकलों को हवा देने वाली एक टिप्पणी में पवार ने कहा, मुझे बताया गया है कि मैं नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सख्त व्यवहार नहीं करता हूं। मुझे नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम करने में कभी दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन पार्टी विधायकों की मांग पर यह भूमिका स्वीकार की थी। पवार ने कहा कि उनकी मांग पर फैसला करना राकांपा नेतृत्व पर निर्भर है। उन्होंने कहा, "मुझे पार्टी संगठन में कोई भी पद दे दें। मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसके साथ पूरा न्याय करूंगा।

एमवीए सरकार गिरने के बाद बने थे नेता प्रतिपक्ष

पवार ने महा विकास आघाड़ी (एमवीए) गठबंधन सरकार गिरने के बाद पिछले वर्ष जुलाई में नेता प्रतिपक्ष का पदभार संभाला था। तत्कालीन एमवीए सरकार में वह उपमुख्यमंत्री थे। शिवसेना में विद्रोह के कारण तत्कालीन एमवीए सरकार गिर गयी थी। गौरतलब है कि राकांपा प्रमुख शरद पवार ने हाल ही में अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी थी, जबकि दूसरे कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को उन्होंने अन्य राज्यों की जिम्मेदारी दी। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि शरद पवार के इस फैसले से अजित पवार खुश नहीं हैं।

(भाषा इनपुट के साथ)

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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