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Himachal Politics Crisis: लगातार मंडरा रहा सरकार गिरने का खतरा, खड़गे को AICC ऑब्जर्वर ने सौंपी रिपोर्ट; दिए ये सुझाव

Himachal political crisis : हिमाचल राजनीतिक घटनाक्रम पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ऑब्जर्वर ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दी है। रिपोर्ट से जुड़ी एक्सक्लूसिव जानकारी टाइम्स नाउ नवभारत के पास मौजूद है। आपको बताते हैं कि आलाकमान को रिपोर्ट के जरिए क्या सुझाव दिए गए हैं।

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हिमाचल में कांग्रेस का क्या होगा?

Photo : Times Now Digital

Himachal Political Crisis Latest Updates: हिमाचल प्रदेश की सियासत में बीते दिनों जमकर उठापटक का दौर देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव में अजब खेला हो गया। छह कांग्रेस विधायकों ने बगावत कर दी, जिसके सरकार गिरने का डर सताने लगा। हालांकि किसी तरह सरकार तो बच गई, लेकिन पार्टी में कलेश बढ़ने लगा। इसी के बाद कांग्रेस पार्टी ने हालात का मुआयना करने के लिए ऑब्जर्वर भेजा। ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग से लेकर सरकार गिरने तक की कहानी बताई गई है। किस तरह प्रियंका गांधी की सक्रियता ने फिलहाल तो सरकार बचाया, लेकिन बीजेपी के ऑपरेशन लोटस से बचाने का कांग्रेस का क्या प्लान है?

हिमाचल की सियासत: ऑब्जर्वर कमेटी में कौन-कौन?

डीके शिवकुमार(उपमुख्यमंत्री, कर्नाटक)

भूपिन्दर सिंह हुड्डा(पूर्व CM, हरियाणा)

भूपेश बघेल(पूर्व CM, छत्तीसगढ़)

ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में तीन अहम बातों का किया गया जिक्र

हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि विधायकों के क्रॉस वोटिंग का अंदाजा नहीं था ये हास्यास्पद है। पार्टी को एकजुट रखने में CM नाकाम रहे। अभी भी CM सबको साथ रख इसपर ऑब्ज़र्वर को संदेह सकेंगे है।

हिमाचल के पूरे रणनीतिक प्रकरण में विक्रमादित्य सिंह के बर्ताव को ऑब्जर्वर के रिपोर्ट में अनुशासनहीनता बताया जा रहा है। विक्रमादित्य पर पार्टी भरोसा नहीं कर पा रही है।

ऑब्जर्वर ने पाया कि 6 विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने के लिए विधायकों को कई करोड़ रुपये दिये गये और बीजेपी अभी भी सरकार को गिराने की कोशिश लगातार कर रही है।

रिपोर्ट में बताया, सरकार बचाने के लिए क्या उपाय किया जाए

तीन पन्ने के इस रिपोर्ट में ऑब्जर्वर ने हिमाचल में सरकार बचाने के लिए क्या उपाय किया जाए इसकी अनुशंसा की। ऑब्जर्वर की तरफ से कांग्रेस नेतृत्व को कड़ा सुझाव दिया गया। प्रतिभा सिंह को लोकसभा लड़ाए जाने की अनुशंसा की गई। ये भी कहा गया कि संगठन की कमान किसी और को दिया जाए।

इस रिपोर्ट में ये सुझाव दिया गया कि लोकसभा चुनाव तक CM बदलना पार्टी हित में नहीं होगा। छह सदस्यीय कोऑर्डिनेशन कमिटी का गठन किया जाए। जिसमें CM, उपमुख्यमंत्री, PCC चीफ, दो पार्टी नेता जो अध्यक्ष कहे और एक सदस्य सरकार बताए।

ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि दर्जन भर विधायकों के असंतोष को दूर करने के लिए बोर्ड/को-ऑपरेशन चेयरमैन आचार संहिता लगने से पहले नियुक्त किया जाए।

हिमाचल में लगातार मंडरा रहा सरकार गिरने का खतरा

इसके अलावा 6 बागी विधायकों से संपर्क करके उसकी यूनिटी को तोड़े जाने का प्रस्ताव ऑब्जर्वर ने अपनी रिपोर्ट में दिया। ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में ये बताया गया है कि बीजेपी लगातार कोशिश कर रही है कि कांग्रेस की सरकार गिराकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराया जाए। हिमाचल गए ऑब्जर्वर ने अपनी अनुशंसा को जल्द से जल्द लागू करने की बात कही है, क्योंकि सरकार गिरने का खतरा लगातार हिमाचल में मंडरा रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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